जिले में गर्मी की छुट्टियों में बच्चों व लोगों को इधर-उधर जाने की जरूरत नहीं होगी। पर्यटन विभाग की ओर से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए फन सिटी व वाटर पार्क खुलवाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए पर्यटन विभाग की तरफ से अनुदान भी दिया जाएगा। उद्यमी भी इस व्यवसाय में निवेश कर सकेेंगे। इसमें वाराणसी के फन सिटी व वाटर पार्क के मालिकों को बातचीत के लिए बुलाया गया है।
पर्यटन विभाग का कहना है कि एक वाटर पार्क शुरू हो जाने से गर्मी के दिनों में लोगों को वाराणसी व आस-पास के महानगरों में नहीं जाना पड़ेगा। 70 हजार से एक लाख तक की आबादी वाले क्षेत्रों में मिनी वाटर पार्क खोला जाता है। इसके लिए 60 से 90 लाख रुपये खर्च करने होंगे। मध्यम वर्गीय वाटर पार्क दो से चार एकड़ की जमीन में शुरू किया जा सकता है। यह एक लाख से अधिक और तीन लाख तक की आबादी वाले क्षेत्रों के लिए सही होता है। इसके लिए 1.20 करोड़ से 1.50 करोड़ रुपये निवेश करना पड़ सकता है। बड़े स्तर पर 10 लाख से अधिक आबादी पर छह से 10 एकड़ भूमि पर वाटर पार्क बनाया जा सकता है। इसमें चार से पांच करोड़ रुपये के खर्च आएंगे। निर्माण से पहले इस बात का ध्यान देना होगा कि यह कृषि योग्य भूमि नहीं होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में प्रशासन की तरफ से अनुमति नहीं मिलेगी। साथ ही बेहतर पार्किंग व अच्छे वातावरण का ख्याल रखना होगा। इसका किराया न्यूनतम 500 रुपये के आस-पास होता है। पार्किंग से लेकर कैंटीन आदि माध्यमों से भी इसमें कमाई होती है।
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पर्यटन विभाग की तरफ से फन सिटी व वाटर पार्क खुलवाने की तैयारी है। इसके के लिए निवेशकों की तलाश की जा रही है। साथ ही वाराणसी के वाटर पार्क संचालकों को भी बातचीत के लिए बुलाया गया है। इससे यहां के लोगों को वाटर पार्क में लुत्फ उठाने के लिए महानगर की तरफ नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही संचालकों की भी अच्छी कमाई हो जाएगी। - मनोकामना राय, प्रभारी जिला पर्यटन अधिकारी।