दांतों का एनामल आ सकता है वापस
-पूविवि में अल्ट्रासोनिक एवं पदार्थ विज्ञान विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन
-शोधार्थियों को सम्मेलन से मिलेगी नई दृष्टि : प्रो. विक्रम
-हर्षित जैन को मिला डॉ. एम पंचोली स्मृति पुरस्कार
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। पूर्वांचल विश्वविद्यालय में अल्ट्रासोनिक एवं पदार्थ विज्ञान विषयक तीन दिनी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अंतिम दिन वैज्ञानिकों ने शोध पत्र पढ़कर अल्ट्रासोनिक एवं पदार्थ विज्ञान के प्रभाव को विस्तार से समझाया। प्रो. राजेंद्रन ने बताया कि विभिन्न मेटल और नॉन मेटल के ऑक्साइड को बड़े स्तर पर बना सकते हैं। नैनो टेक्नालाजी और नैनो पार्टिकल से जेब्रा मछली में रिप्रोडक्शन कर 50 फीसदी से ज्यादा बड़ा बना सकते हैं। इससे आर्टिफिसियल टिश्यू भी बना सकते हैं। खासतौर से इसके माध्यम से हम दांतों का खोया हुआ एनामल भी लौटा सकते हैं।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि अल्ट्रासोनिक सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रो. विक्रम कुमार ने कहा कि सम्मेलन में विभिन्न आयामों पर हुई चर्चा शोधार्थियों को नई दृष्टि देगी। सोसाइटी की ओर से उत्कृष्ट शोधपत्र प्रस्तुति के लिए भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के हर्षित जैन को डॉ.एम. पंचोली स्मृति पुरस्कार दिया गया, जबकि चंद्र स्वरूप यादव को पोस्टर प्रस्तुति के लिए प्रथम और मोहित कुमार गुप्ता को द्वितीय पुरस्कार मिला।
पूविवि के आर्यभट्ट सभागार में आयोजित समापन सत्र में निर्णायक समिति ने डॉ.धीरेंद्र कुमार चौधरी को शोधपत्र प्रस्तुति के लिए प्रथम और पुणे की सोनल डी.पाटिल को द्वितीय पुरस्कार मिला। वहीं बीएचयू की मोनिका को पोस्टर प्रस्तुति में प्रथम और डॉ. मनीष प्रताप सिंह को द्वितीय स्थान मिला। अतिथियों का आभार जताते हुए कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय ने गुणवत्ता युक्त शिक्षा को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है।
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एक ही स्टेप में खत्म होंगे कैंसर के बैक्टीरिया
हैदराबाद सीएसआईआर कोशकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ अमित अस्थाना ने कहा कि कैंसर में लिपोसेंस पद्धति के माध्यम से प्रभावी कार्य किया जा रहा है। लिपोसेंस प्रक्रिया के माध्यम से हम कैंसर के स्थान पर आवश्यक दवा का उपयोग करके उस स्थान के सेल को क्षतिग्रस्त करते हैं, जिससे वहां के बैक्टीरिया निष्क्रिय हो जाते हैं। इसका प्रयोग महिलाओं के ब्रेस्ट कैंसर में काफी उपयोगी होगा। वहीं पुणे विश्वविद्यालय के प्रो. विलास राव तभाने ने ध्वनि लहरों की मानव जीवन पर होने वाले प्रभाव और उपयोगिता पर विस्तार से बताया।