शाहगंज। राजकीय महिला अस्पताल में मानवाधिकार जागरुकता सेमिनार का आयोजन शनिवार को किया गया। वक्ताओं ने कहा कि मानवाधिकार का मतलब समानता और गरिमा से जीवन जीने का हक है। मानवाधिकार दो तरीके से प्राप्त होता है नैसर्गिक व कानूनी। पुलिस मुकदमा नहीं दर्ज करती है तो न्यायालय की शरण ली जा सकती है।
डीएसएचआरडी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सखाराम सिंह यादव ने कहा कि मानवाधिकार वह अधिकार है जो किसी भी व्यक्ति के लिए जीवन बिताने एवं उसके अस्तित्व के लिए आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि डीएसएचआरडी ह्यूमन राइट के राष्ट्रीय चेयरमैन मधु गुप्ता ने कहा कि मानवाधिकार का सवाल मानव गरिमा की रक्षा से शुरू हुआ। घरेलू हिंसा, महिला हिंसा का बढ़ना चिंता का विषय है। अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति राजमणि चौहान ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य आमजन की पहुंच से बाहर हो गया है जबकि यह हर नागरिक का अधिकार है।
सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल के छात्र छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। संचालन ओपी सिंह ने किया। प्रशांत अग्रहरि ने आभार जताया। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ प्रियांशी जायसवाल ने आगंतुकों का स्वागत करके किया। इस अवसर पर आशा बिहारी, मोहन सिंह, सौरव कुमार मोदनवाल, धर्मा चौबे, अमित कुमार अग्रहरि, बागीश सिंह, रमाकांत जायसवाल, प्रदीप, डॉ एसएल गुप्ता, मोहम्मद अब्बास, राहुल वर्मा, डॉ. आलोक पालीवाल उपस्थित रहे।