विद्युत उपकेंद्र की भूमि का पट्टा निरस्त करने की मांग को लेकर सोमवार को ग्रामीण बेमियादी धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि शीघ्र पट्टा निरस्त नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और तेज करने को बाध्य होंगे।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डीएम के निर्देश के बाद भी तहसील के कर्मचारी पट्टा निरस्त करने की रिपोर्ट नहीं दे रहे हैं।
रुधौली गांव में स्थित विद्युत उपकेंद्र जिस भूखंड पर स्थित है, उसमें सब स्टेशन के अलावा कर्मचारियों के लिए आवास भी बना है।
पूरे परिसर की बाउंड्री भी की गई है। इस परिसर की भूमि को ग्राम प्रधान और तहसील के कर्मचारियों की मिली भगत से कई लोगों को पट्टा कर दिया गया है। जिन लोगों को भूमि का आवंटन किया गया है
उनमें कुछ ऐसे लोग भी हैं जो गांव के बाहर के हैं। अमर उजाला ने 8 सितबर 2014 के अंक में खबर छाप कर इस बात का खुलासा किया था। इसके बाद ग्रामीणों ने डीएम और तहसील के अधिकारियों से शिकायत की।
डीएम ने पट्टा निरस्त कर उसकी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था लेकिन दो महीने से अधिक समय बीत गया तहसील से निरस्तीकरण की रिपोर्ट नहीं दी गई।
धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि लखनऊ-बलिया राजमार्ग पर स्थित उपकेंद्र की भूमि बहुत कीमती है। सोची समझी रणनीति के तहत भूमि का पट्टा किया गया है।
धरने में सूबेदार यादव, रमेश यादव, अरविंद उपाध्याय, सुखदेव, राजेश यादव, जगजीवन, कैलाश उपाध्याय, देवेंद्र पांडेय, प्रमोद सिंह, राजन सिंह, विवेक सिंह, गिरिजा दत्त पांडेय, चंद्रधर, विनोेद सिंह समेत अन्य लोग शामिल हैं।