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तीसरे दिन भी अभिलेख जमा करने नहीं पहुंची तीन शिक्षिकाएं

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जौनपुर। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में तैनात शिक्षक और कर्मचारियों के अभिलेखों के सत्यापन के लिए तीसरे दिन गुरुवार तक 245 ने अपने शैक्षिक प्रमाण पत्रों के मूल अभिलेख बीएसए कार्यालय में जमा कर दिए। जबकि एक प्रीति यादव की फर्जी नियुक्ति का खुलासा हो चुका है और मुफ्तीगंज की ही वार्डेन लीना गुप्ता ने नवंबर में ही नौकरी छोड़ चुकी हैं। शेष तीन शिक्षिकाओं का मूल दस्तावेज जमा करने के लिए तीसरे दिन भी इंतजार होता रहा लेकिन वे नहंीं आ सकीं।
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बक्शा, मुंगराबादशाहपुर और मुफ्तीगंज की ये तीनों शिक्षिकाएं चाहे जिस भी कारण से अभीतक अपने मूल दस्तावेज जांच के लिए नहीं जमा किया हो लेकिन उनकी नियुक्ति पर संदेह गहराता जा रहा है। जिले की कुल 19 कस्तूरबा विद्यालयों में शिक्षक और कर्मचारियों के कुल 266 पद हैं। लेकिन मौजूदा समय में कुल 250 शिक्षक, वार्डेन, और कर्मचारी कार्यरत हैं। 16 पद खाली चल रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों के कस्तूरबा विद्यालयों में अनामिका के नाम से फर्जी नियुक्ति का खुलासा होने के बाद जांच शुरू हुई तो जिले के मुफ्तीगंज स्थित कस्तूरबा विद्यालय में तैनात पूर्णकालिक शिक्षिका प्रीति यादव की फर्जी नियुक्ति का भी खुलासा हुआ है। एक के बाद एक फर्जी नियुक्तियों के खुलासे के बाद शासन के निर्देश पर सभी कस्तूरबा विद्यालयों में तैनात शिक्षक और कर्मचारियों की जांच शुरू कर दी गई है। 16 जून उनके शैक्षिक प्रमाण पत्रों के मूल दस्तावेज जमा कराए जा रहे हैं। गुरुवार को शाम तक मुफ्तीगंज की रिमझिम सिंह और मुंगराबादशाहपुर की पूर्णकालिक शिक्षिका श्वेता उपाध्याय समेत तीन शिक्षिकाएं अपने दस्तावेज जमा करने नहीं पहुंची। बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी का कहना है कि अधिकतर शिक्षक कर्मचारियों ने शैक्षिक प्रमाण पत्र जमा कर दिए हैं। जिन शिक्षिकाओं ने अभी तक अपने मूल अभिलेख नहीं जमा किए हैं उनमें से एक ने नवंबर में ही नौकरी से त्यागपत्र दे दिया है। अन्य का भी कहीं और चयन हो गया है।
पुलिस से कराया जाएगा पते का सत्यापन
जौनपुर। कस्तूरबा विद्यालयों में तैनात सभी शिक्षक कर्मचारियों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन के साथ ही उनके स्थाई निवासा का सत्यापन कराया जाएगा। उनके पते का सत्यापन पुलिस करेगी।
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बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी की माने तो कस्तूरबा विद्यालयों में फर्जी नियुक्ति के आधार पर नौकरी करने वालों की जांच सिर्फ उनके शैक्षिक प्रमाण पत्रों से पूरी होने वाली नहीं है। जिस तरह से नियुक्ति में फर्जीवाड़े के खुलासे हो रहे हैं उससे काफी गुंजाइश इस बात की भी है दूसरों के असली दस्तावेजों के आधार पर अवैध रूप से नौकरी करने वालों के नाम भी मेल खा रहे हों। ऐसे में पुलिस फोटो के साथ उनके पते का सत्यापन करेगी तो उसमें फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश नहीं रह जाएगा।
नकली प्रीति का सुराग नहीं लगा सकी पुलिस
जौनपुर। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय मुफ्तीगंज में प्रीति यादव के नाम पर पूर्णकालिक शिक्षिका के पद पर नौकरी करने वाली नकली प्रीति का पुलिस अभीतक सुराग नहीं लगा सकी। इस मामले में पुलिस ने 13 जून की रात में केस दर्ज किया है। जांच शुरू होने से पहले ही ड्यूटी से लापता हुई शिक्षिका का मोबाइल फोन लगातार बंद आ रहा है। उसने नियुक्ति के समय अपना जो स्थाई पता दिया है उस पते पर भी उसके नाम का कोई नहीं मिला है।
प्रभारी निरीक्षक पवन कुमार उपाध्याय का कहना है कि मामले की विवेचना कर रहे उप निरीक्षक को नियुक्ति से संबंधित सभी अभिलेख कब्जे में लेने के लिए कहा गया है। नकली प्रीति का पता खोजने के लिए इस मामले में गिरफ्तार बीएसए कार्यालय के ईएमआईएस इंचार्ज आनंद सिंह से पूछताछ की जाएगी।
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