29 अगस्त, 2006 में हुए युवक की हत्या मामले में पहले ही कोर्ट ने गोली मारने वाले अपचारी की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड में भेज दी थी। तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ रूपाली सक्सेना की अदालत ने हत्या का दोषी पाते हुए नेवढ़िया थाना क्षेत्र निवासी जवशीपुर दोषी मोनू सिंह उर्फ सचिन, चंदन सिंह उर्फ संदीप, वीरेंद्र सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 10-10 हजार रुपये जुर्माना लगाया।
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वादी मुकदमा विनोद कुमार सिंह ने नेवढ़िया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई कि 29 अगस्त 2006 की दोपहर एक बजे मेरा लड़का कुंवर प्रताप सिंह उर्फ सचिन जो मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था घर आया था। वह स्नान करने के लिए जा रहा था।
इस दौरान गांव निवासी आरोपी मोनू बेटे को लेकर आरोपी चंदन सिंह व एक किशोर के घर ले गए। वहां बरामदे में मौजूद वीरेंद्र सिंह व चंदन सिंह ने बेटे को जान से मारने के लिए ललकारा। इसके बाद आरोपी किशोर ने बेटे के सीने पर गोली मार दी। बेटा चिल्लाता हुआ भागा लेकिन आरोपियों के दरवाजे पर गिर पड़ा।
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उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने विवेचना करके कोर्ट में केस डायरी दाखिल किया। सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट में गवाहों का बयान अंकित कराया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर हत्या का दोषी पाते हुए तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।