जौनपुर में महज तीन बिस्वा भूमि के लिए खुटहन के फिरोजपुर गांव में तीन लोगों की जान चली गई। पट्टे की इस भूमि के लिए वर्षों से कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते आ रहे दोनों पक्षों के लोग कब्जे के लिए इतने व्याकुल हो गए कि उनसे सब्र नहीं हो पाया। उनकी तो जिंदगी गई ही, परिवार के कई अन्य सदस्य भी लहूलुहान होकर अस्पताल में भर्ती है। घटना के बाद हर कोई जमीन के लिए हुए इस खूनी संघर्ष से हतप्रभ था। लोगों का कहना था कि अगर किसी ने सब्र कर लिया होता तो यह अनहोनी नहीं होती।
फिरोजपुर के रामचंद्र और रामखेलावन के बीच भूमि का विवाद ढाई दशक पुराना है। राजस्व विभाग की ओर से दोनों को कृषि के लिए भूमि का पट्टा किया गया था। प्रशासन के मुताबिक विवादित भूमि पर 1994 में रामखेलावन के पक्ष में पट्टा हुआ था। इस भूमि पर पहले से ही रामचंद्र का कब्जा था। दोनों पक्ष विवाद निपटाने के लिए न्यायालय गए। स्थानीय न्यायालय से उच्च न्यायालय तक उनका विवाद पहुंच गया, लेकिन किसी भी फैसले पर दोनों पक्ष सहमत नहीं हो सके। नतीजा मामला एक न्यायालय से दूसरे न्यायालय के बीच तारीखों में ही उलझा रहा।
पुलिस-प्रशासन भी बार-बार विवाद सुलझाने की बजाए उसका अस्थाई समाधान ही करते रहे। बीते 17 अगस्त को उच्च न्यायालय के ताजा आदेश के तहत पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कब्जा हटवाया, मगर दूसरे पक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। प्रशासनिक स्तर पर विवाद न सुलझने का ही असर रहा कि दोनों पक्षों ने आपस में ही फैसला करने पर उतारु हो गए। नतीजा तीन की जान चली गई।
विवाद की सूचना पर भी नहीं दिखाई तत्परता
भूमि विवाद को लेकर पुलिस कितनी संजीदा थी इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रविवार की सुबह ही हलका सिपाही त्रिगुन राम मौके पर पहुंचा था। पूछताछ कर वापस लौट गया। खूनी संघर्ष के बाद देर शाम जब आईजी विजय सिंह मीना गांव पहुंचे और वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की तो उन्हें इसकी जानकारी हुई। हलका सिपाही से इसका कारण पूछा तो उसने क्षेत्र भ्रमण पर जाने की दलील दी। इस पर भड़के आईजी ने उसे जमकर फटकार लगाई। उच्चाधिकारियों को सूचना न देने पर भी नाराजगी जताई। आईजी ने गांव के लोगों और घायलों से पूछताछ कर पूरे प्रकरण की जानकारी ली। एसपी को पर्याप्त फोर्स तैनात रखने का निर्देश दिया।
दोनों पक्षों से 16 लोग हिरासत में
एसपी अशोक कुमार ने बताया कि पट्टे की जमीन को लेकर दो पक्षों में हुए विवाद में तीन हत्या के बाद मौके पर फोर्स लगाई गई है। अन्य सभी घायलों की हालत खतरे से बाहर है। दोनों पक्षों से 16 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। तहरीर के आधार पर केस दर्ज करते हुए कार्रवाई की जाएगी।
खून से लाल हुआ खुटहन क्षेत्र, चार माह में आठ हत्याएं
खुटहन। क्षेत्र में चार माह के भीतर हुई आठ हत्याओं ने कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है। घटना के बाद मौके पर पहुंच शव को कब्जे में लेना और आरोपियों की धरपकड़ को दबिश देने तक ही पुलिस कार्रवाई सीमित होकर रह गई है। क्षेत्र में पहली घटना मखदूमपुर गांव में एक मई की सुबह की है। जहां ग्राम प्रधान तबरेज अहमद अपने घर से पटैला बाजार जा रहे थे। उनकी बाइक पर पीछे पूर्व प्रधान राकेश वर्मा भी बैठे हुए थे।
घर से दो सौ मीटर आगे गांव के ही रामफेर वर्मा कार लेकर आ रहे थे। उनकी गाड़ी और बाइक में इतनी जोरदार टक्कर हुई कि तबरेज ने कुछ देर बाद ही दम तोड़ दिया। तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। दूसरी घटना बड़सरा गांव की है। दो जून को भूमि विवाद में राजेश तिवारी (52) को पट्टीदार ने मौत के घाट उतार दिया।
छह जून को बच्चों के बीच क्रिकेट के विवाद में हुई मारपीट पिलकिछा गांव के नकबी पुरवा निवासी मनीष गुप्ता (17) पुत्र अच्छेलाल की पिटाई की गई, जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। चौथी घटना गजेंद्रपुर की है, जहां पर ढाई विस्वा जमीन के लिए पड़ोसियों ने अभय प्रताप यादव 22 को लाठी डंडा से पीटकर मौत के घाट उतार दिया। पांचवी घटना महमद गांव में इमामपुर मार्ग के बगल शनिवार की सुबह खेत मे खड़ी एक बोलेरो गाड़ी में युवक की सिर कूंचकर हत्या कर दी गई।