मछलीशहर। शक्ति की अधिष्ठात्री मां दुर्गा की कृपा प्राप्ति के लिए नवरात्र में मां का पूजन फलदाई होता है। इस वर्ष शारदीय नवरात्र 15 अक्तूबर रविवार से शुरू हो रहा है। ज्योतिषाचार्य डॉ.शैलेश मोदनवाल के अनुसार तुला लग्न में नवरात्र लग रहा है। इस लग्न का स्वामी शुक्र है धन, वैभव एवं ऐश्वर्य प्रदाता देवता माना जाता है। तुला लग्न की इष्ट देवी भगवती दुर्गा है। उक्त दिन ही अपने मूल त्रिकोण राशि कुंभ पर रहते हुए न्याय के देवता शनि शतभिषा नक्षत्र से निकलकर मंगल के धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस अवस्था में शनि 24 नवंबर तक रहेंगे। शनि का यह नक्षत्र परिवर्तन नवरात्र प्रतिपदा को हो रहा है इसलिए इसका प्रभाव नवरात्र पर भी पड़ेगा। धनिष्ठा धनदायी नक्षत्र है, शनि न्याय प्रिय देवता है। इस प्रकार शनि का यह परिवर्तन धनलाभ के साथ ही शुभ फलदायी होगा। वृषभ, मिथुन और मकर राशि के लोगों के लिए शनि का यह परिवर्तन विशेष लाभदायी होगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ टीपी त्रिपाठी के अनुसार चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग होने से कलश स्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त मध्यान्ह में 11.36 बजे से 12.24 बजे तक उचित होगा। पंडित मुरारी श्याम पांडेय के अनुसार दुर्गा महाष्टमी व्रत 22 अक्तूबर रविवार को होगा। जबकि महानवमी 23 अक्तूबर को होगी। नौ दिन का व्रत रहने वाले श्रद्धालु 24 को प्रातः काल व्रत का पारण करेंगे।