जौनपुर। वाराणसी-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मकरा गांव स्थित बाईपास के पास मंगलवार की सुबह हुए हादसे में मारे गए पांच लोगों का शव उनके गांव शाम को पहुंचा तो कोहराम मच गया।
सिकरारा थानाक्षेत्र के बांकी गांव में शास्वत सिंह, बृजेश सिंह और हौसला मिश्र का शव पोस्टमार्टम के बाद एक साथ पहुंचा। शव घर पर पहुंचते ही चीख-पुकार तेज हो गई। बड़ी संख्या में लोग जौनपुर से ही शव के साथ गांव पहुंचे थे। एक ओर हौसला मिश्र की पत्नी मंजू को अंतिम वक्त पर पति के न होने की सूचना मिली तो वह चीखकर गिर पड़ीं। बृजेश की पत्नी नमिता भी जब पति का चेहरा देखीं तो दहाड़ मार कर रोने लगी।
सुनील सिंह के बेटे शास्वत का शव देख मां रुचि और बहन शालिनी चीख पड़ीं। दादी अमरावती बेसुध हो गईं। सैकड़ों लोग सिर झुकाए मौन शव यात्रा में शामिल दिखे। राम घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। उधर मुंगराबादशाहपुर थाना क्षेत्र सरायडिंगुर गांव निवासी दो सगे भाई प्रनुग्रह सिंह और प्रभुदेव सिंह की लाश पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंची तो कोहराम मच गया। पूरे गांव में मंगलवार को चूल्हे नहीं जले। शव आने से पहले मायके से आई मां वंदना उर्फ रिंकी, मृतकों के पिता विवेक सिंह और बड़ी तान्या सिंह गाड़ी से उतरते ही बेहोश हो गए। उन्हें किसी तरह होश में लाया गया। माता पिता और बहन बार-बार शव से लिपटकर बिलखते रहे। गमगीन माहौल में पूरे गांव में सन्नाटा पसरा रहा। दोनों भाइयों का अंतिम संस्कार प्रयागराज के छतनाग घाट पर किया गया।