महराजगंज। परिषदीय स्कूलों में कायाकल्प कर उन्हें इंग्लिश मीडियम स्कूलों की तर्ज पर तैयार तो किया गया लेकिन आज तक 20 से अधिक स्कूल ऐसे हैं जहां तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है। छात्र मेड़ के सहारे पगडंडी और कीचड़ के बीच चलकर स्कूल पहुंचते हैं।
प्रशासन ने स्कूलों को लैब, टाइल्स और प्रोजेक्टर से लैस करके उन्हें आधुनिक बनाया जा रहा है। लेकिन 20 स्कूल ऐसे हैं जहां पहुंचने के लिए संपर्क मार्ग भी नहीं है। बरसात में ऐसे स्कूलों की स्थिति बद से बदतर हो जाती है। कीचड़ में गिरकर बच्चों के कपड़े खराब हो जाते हैं। कपड़े खराब होने पर बच्चे स्कूल जाने के बजाय घर लौट जाते हैं। थोड़ी से बारिश पर भी पगडंडी कीचड़युक्त हो जाती है। घुटने भर पानी में घुसकर बच्चों और शिक्षकों को स्कूल आना पड़ता है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों ने बताया कि जब वह घर से निकलते हैं तो हर वक्त डर लगता है कि किसी तरह सही सलामत स्कूल पहुंच जाएं। कंपोजिट विद्यालय ढेमा के प्रधानाध्यापक नन्हें अली ने बताया कि विवादों के कारण कई वर्षों से रास्ता नहीं बन पा रहा है। रास्ते के लिए जमीन के पैमाइश की भी मांग की गई थी। लेकिन स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है। विधायक रमेश चंद्र मिश्रा ने कहा कि विद्यालय में बच्चों के लिए रास्ता न बन पाना एक बड़ी समस्या है। वह अपने स्तर से डीएम से बात करके जल्द सड़क बनवाने का प्रयास करेंगे।
इन स्कूलों तक पहुंचने के लिए नहीं रास्ता
पूर्व माध्यमिक विद्यालय फत्तूपुर, कंपोजिट विद्यालय बरहूपुर, प्राथमिक विद्यालय केवटली, बनबीरपुर, मया, भटौली, ताजनपुर, ढेमा समेत करीब 20 विद्यालयों में आने जाने के लिए रास्ता नहीं है। कंपोजिट विद्यालय हिलाली, भटौली, बगौझर, प्राथमिक विद्यालय सरसरा सहित 12 विद्यालयों में जाने के लिए कच्चा रास्ता है।
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स्कूलों तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है। इससे छात्रों को परेशानी हो रही है। इसके लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। गांव में कुछ विवादों के कारण रास्ता नहीं बन पाया है।
-रमेश चंद्र पटेल, बीईओ, महराजगंज