जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती मरीज। संवाद
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जौनपुर। शहीद उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय में स्थापित बर्न वार्ड में प्लास्टिक सर्जरी की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन गंभीर मरीजों का इलाज करने के बजाय उन्हें वाराणसी रेफर कर रहा है। यह समस्या कई बार उच्चाधिकारियों के सामने रखी गई लेकिन समाधान नहीं निकल सका। जिला अस्पताल का कायाकल्य 1998 में किया गया था। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री रमापति शास्त्री ने अस्पताल का लोकार्पण किया था। इसी के साथ ब्लड बैंक से सटे 12 बेड की बर्न यूनिट स्थापित की गई थी। मरीजों की सुविधा के लिए दो एसी लगाई गई है। जिसमें एक बंद पड़ी है। दूसरी चलती जरूर है लेकिन कूलिंग नहीं होने के कारण मरीज परेशान हो रहे हैं। फिजीशियन ही मरीजों की निगरानी करते हैं। जबकि मरीजों की देखभाल के लिए पर्याप्त स्टाफ की तैनाती भी है। करीब 20 दिन पहले अमर उजाला ने बर्न वार्ड में भर्ती मरीजों को मच्छरदानी नहीं दिए जाने की खबर को प्राथमिकता से प्रकाशित किया था। दूसरे दिन ही सीएमएस ने मरीजों के लिए मच्छरदानी की व्यवस्था कराई। दूसरे दिन जब एडी स्वास्थ्य एसके उपाध्याय जिला अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे थे तो अमर उजाला ने एसी बंद रहने और मच्छरदानी नहीं देने का मामला उठाया था। बर्न वार्ड के बगल स्थित अस्पताल में मुख्य भवन के दूसरे और तीसरे तल से गिरने वाले पानी की पाइप टूटने से गंदा पानी हमेशा बहता रहता है। जिससे संक्रमण का खतरा बना है। पीछे की तरफ बने बरामदे में ही मरीज के तीमारदारों का आना जाना लगा रहता है। जिला अस्पताल के सीएमएस डा. एके शर्मा ने बताया कि बर्न यूनिट में प्लास्टिक सर्जरी करने के लिए कोई पद सृजित नहीं है। यह व्यवस्था मंडल स्तर पर होती है। वैसे ज्यादातर मरीज ठीक हो जाते हैं, जिन्हें प्लास्टिक सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है उन्हें वाराणसी के मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा रेफर किया जाता है।