जौनपुर। जिला अस्पताल में मरीजों के लिए जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। अस्पताल में न तो दर्द की दवा है और न ही एसिडिटी व मधुमेह की। इंसुलिन के इंजेक्शन समाप्त हो चुके हैं। दूरदराज से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को अस्पताल में दवा के लिए भटकना पड़ रहा है। उन्हें सादे कागज पर दवा लिखकर बाहर का रास्ता दिखा दिया जा रहा है।
जिला अस्पताल में रोजाना 11 सौ से 12 सौ तक की ओपीडी होती है। इसमें विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीज पहुंचते है। अस्पताल आने वाले मरीजों को उम्मीद होती है कि एक रुपये की पर्ची उनका इलाज हो जाएगा। मगर यहां आने के बाद उन्हें पता चल रहा है कि बाहर की दुकानों से महंगी दवाएं लेनी पड़ेंगी। मौसमी बीमारियों की दवाएं भी अस्पताल में नहीं हैं और मधुमेह जैसी बीमारियों की नियमित चलने वाले दवाएं भी। सीएचसी और पीएचसी पर दवाओं की स्थिति ठीक नहीं है। सीएमएस डॉ. एके शर्मा का दावा है कि अस्पताल में मरीजों के लिए पर्याप्त दवाएं हैं। जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्तर पर भी दवाओं की खरीद भी की जाती है। तो क्या डाक्टर कमीशन के चक्कर में मनमाने तरीके से बाहर की दवाएं लिख रहे हैं।