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अतिक्रमण से गुम हो गई पटरियां, चौराहे-तिराहों पर भी नहीं जगह

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कोतवाली चौराहे पर पार्क के अंदर की गई बाईकों की पार्किंग । - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। जाम की समस्या शहर के लिए नासूर बन चुकी है। इसके पीछे मुख्य वजह अतिक्रमण की है। कई जगह पटरियां अवैध कब्जे की जद में हैं और कुछ मुहल्लों में दुकानदार सड़कों पर भी सामान रख देते हैं। इसके अलावा जहां-तहां पार्किंग से रही सही कसर पूरी हो जाती है। यातायात पुलिस ने कई मार्गों को वन-वे तो कर दिया है लेकिन अतिक्रमण हटाने की ठोस पहल नहीं हुई।
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करीब छह सौ साल पुराने शहर की बसावट भी पुराने ढंग की है। सड़कें संकरी और गलियां तंग हैं। कई प्रमुख बाजार तो गलियों में ही आबाद हैं। अफसर मानते हैं कि शहर के प्राचीन स्वरूप से ज्यादा छेड़छाड़ संभव नहीं है। अफसरों की इस उदासीनता का फायदा उठाकर दुकानदार पटरियों पर कब्जा कर लेते हैं। हाईवे पर स्थित वाजिदपुर तिराहा, पालीटेक्निक और जेसीज चौराहों को छोड़ दें तो अन्य चौराहों पर इतना जगह भी नहीं बचती है कि दो वाहन आसानी से निकल सकें। पॉलीटेक्निक चौराहा से शहर की ओर बढ़ने पर कुछ दूर तक तो पटरी दिखती है लेकिन रुहट्टा होते हुए ओलंदगंज जाने पर पटरियां दिखती ही नहीं है। ओलंदगंज तिराहा और चौराहे पर पटरी है लेकिन वहां बेतरतीब पार्किंग के चलते सड़क संकरी हो जाती है। कमोवेश यही हाल जेसीज की ओर जाने वाले रास्तों का है। चहारसू से कोतवाली और फिर कोतवाली से सब्जी मंडी, गल्ला मंडी होते हुए भंडारी स्टेशन तक पटरियां भी अतिक्रमण की जद में हैं।
हार्न न दें तो टकरा जाएंगे वाहन
अतिक्रमण के कारण ही शहर के अधिकांश चौराहों को विकसित नहीं किया जा सका है। इन चौराहों और तिराहों की स्थिति ऐसी है कि अगर कोई अनजान व्यक्ति बिना हार्न दिए आगे बढ़ना चाहे तो हादसा तय है। अक्सर वाहनों के आपस में टकराने की घटनाएं होती भी हैं।
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यहां सबसे खराब हाल
शहर के ओलंदगंज तिराहा, ओलंदगंज चौराहा, गूलरघाट मोड़, फलवाली गली मोड़, घग्घा चौराहा, कोतवाली चौराहा, मछलीशहर पड़ाव मोड़, सब्जी मंडी, ईशापुर मोड़, रोडवेज तिराहा आदि।
शहर में जहां भी अतिक्रमण है, उसे चिह्नित किया जा रहा है। योजनाबद्ध ढंग से इस पर कार्रवाई की जाएगी। पहले भी कई बार संबंधितों को पटरियां खाली रखने की हिदायत दी गई है। अगर वह नहीं मानते तो सख्ती से अतिक्रमण हटवाया जाएगा। -सहदेव मिश्र, नगर मजिस्ट्रेट
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