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जीवन में विवेक, सत्संग और आध्यात्मिक ज्ञान का विशेष महत्व : पं. रजनीकांत

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श्रीमदद्भागवत कथा में मौजूद भक्तजन। संवाद
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जौनपुर। विवाह मैरेज लॉन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने हनुमान महिमा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और पूतना वध प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सत्संग मनुष्य के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम है। परमात्मा के भजन, संकीर्तन और कथा श्रवण से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति मिलती है। जीवन में सही और गलत के बीच अंतर समझने के लिए विवेक, सत्संग और आध्यात्मिक ज्ञान आवश्यक है। हनुमान की भक्ति और समर्पण का प्रसंग सुनाते हुए कथाव्यास ने कहा कि प्रभु श्रीराम की कथा के प्रति उनका अनुराग अद्वितीय था। मनुष्य को अपने जीवन में भक्ति और सदाचार को स्थान देना चाहिए। उन्होंने कंस और पूतना का प्रसंग सुनाया। कहा कि व्यक्ति को सही-गलत की पहचान कर सदाचार और भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। सात दिवसीय कथा की मुख्य यजमान श्रीमती विमला सेठ हैं। इस दौरान मनोज पांडेय, राकेश कुमार सिंह, सुनील मिश्र, आचार्य सूरत तिवारी, संतोष कुमार, किरण सेठ, रेखा सेठ, बबली सेठ, विशाल सेठ, विपिन सेठ, हर्षित सेठ, हार्दिक सेठ आदि रहे।
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