जौनपुर। जनपद की पहचान शाही पुल से ही होती है। लेकिन, इस पुल पर रात में अंधेरा पसर जा रहा है। पुलिस पर केवल दो-तीन लाइटों को छोड़कर सभी शोपीस बनी हुई हैं। हैरानी की बात यह कि इस ओर अधिकारियों की नजर नहीं पड़ रही है। इससे पुल से होकर गुजरने वालों को परेशानी हो रही है।शहर के मध्य गोमती नदी गुजरी है। इस नदी पर तीन समानांतर पुल शाही, सद्भावना और शास्त्री सेतु बने हैं। सूरज डूबते ही इन पुलों पर अंधेरा पसर जा रहा है। हालांकि इसके लिए पुल पर नगर पालिका की ओर से प्रकाश की व्यवस्था के लिए लाइट और आकर्षक झालर भी लगवाई गईं। इससे इन पुलों की जहां खूबसूरती बढ़ गई थी। वहीं, जिले की पहचान बने इन पुलों से होकर आने-जाने में लोगों को परेशानी भी नहीं होती। इनमें शाही पुल तो शहर की पहचान है। गोमती में इन दिनों लबालब पानी है। पुल पर अंधेरा होना राहगीरों के लिए तो जोखिम भरा है ही, शहर के सौंदर्य पर भी बट्टा लगा रहा है। वजह ऐतिहासिक शाही पुल पर 18 स्ट्रीट लाइटें लगी हैं। शनिवार की रात भोर में चार बजे पुल की अधिसंख्य लाइटें बंद थीं। ओलंदगंज से चहारसू की ओर जाते समय शाही पुल दोनों तरफ की लाइटें बुझी थीं। हालांकि चहारसू की तरफ आखिर में एक लाइट जल रही थी। इसी तरह सद्भावना पुल की तमाम लाइटें बंद हैं। जौनपुर का शाही पुल देश में अपने ढंग का अनूठा पुल है। पुल की चौड़ाई 26 फीट है, जिसके दोनों तरफ दो फीट तीन इंच चौड़ी मुंडेर है। पुल के मध्य में चतुर्भाकार चबूतरे पर एक विशाल सिंह की मूर्ति है, जो अपने अगले दोनों पंजों से हाथी के पीठ पर सवार है। इसके सामने मस्जिद है। पुल के उत्तर तरफ दस व दक्षिण तरफ पांच ताखे हैं, जो अष्टकोणात्मक स्तंभों पर थमा है। इस पुल का निर्माण नदी में विशाल खंभों पर किया गया है। पानी के बहने के लिए 10 द्वार बनाए गए हैं। पुल से इतर इन पर खंभों पर टिकी अष्टभुजीय आकार की गुंबददार छतरी भी बनी हुई है। इस छतरी में लोग खुद को पुल पर दौड़ते वाहनों से सुरक्षित रखकर नदी की बहती धाराओं का विहंगम नजारा देखते हैं।