तहसीलदार न्यायालय में सुनवाई के दौरान सोमवार को अचानक छत का चप्पड़ तहसीलदार मूसा राम के सिर पर गिर गया। इस दौरान न्यायालय में अफरा तफरी मच गई। धूल से सने तहसीलदार को न्यायालय स्थगित करना पड़ा। तहसीलदार न्यायालय का संचालन अभी भी अंग्रेजों के शासन काल में बने अत्यंत जीर्णशीर्ण भवन में हो रहा है। जबकि इस भवन को कई वर्ष पूर्व ही अनुपयोगी घोषित कर इसके गिराने का भी आदेश हो चुका है। इसकी सूचना भी भवन पर चस्पा की गई थी, लेकिन कोई अन्य विकल्प न होने के कारण उक्त जगह ही तहसीलदार कोर्ट चलती है। वहीं बरामदे में अधिवक्ता बैठते है। 10 दिन हड़ताल के बाद सोमवार को कोर्ट चल रही थी। घटना से अधिवक्ता और वादकारी स्तब्ध रह गए। कर्मचारियों ने तौलिये से धूल झाड़ पोछकर तहसीलदार को बाहर निकाला। इसके बाद न्यायालय स्थगित कर दिया गया। अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रघुनाथ प्रसाद, वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश चंद्र सिन्हा, जगदंबा प्रसाद मिश्रा, नागेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव, आरपी सिंह, अशोक श्रीवास्तव, सुरेंद्र मणि शुक्ला, इंदू प्रकाश सिंह, विनय पांडेय आदि अधिवक्ताओं ने मांग किया कि अविलंब जर्जर भवन के छत की मरम्मत कराई जाए, छत पर जल निकासी व साफ सफाई की व्यवस्था की जाए, अन्यथा भविष्य में कोई बड़ी घटना घट सकती हैं।