अलीगंज में नवनिर्मित डिवाइडर पर चढ़ी रोडवेज बस।
जौनपुर। जिले की जीवनरेखा माने जाने वाले वाराणसी-लखनऊ मार्ग का 11 किमी हिस्सा विकास की राह देख रहा है। सीएम की घोषणा और बजट स्वीकृत होने के बावजूद, वन विभाग की एनओसी न मिलने से 139 करोड़ का यह प्रोजेक्ट कागजों में दबा है। विभाग ने सड़क चौड़ी करने से पहले ही बीच में डिवाइडर खड़े कर दिए हैं, जिससे यह मार्ग एक्सीडेंट जोन में तब्दील हो गया है। रोजाना सफर करने वाले 40 हजार लोग अब प्रशासन से बस एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि सुविधा कब, सुरक्षा कब? नईगंज तिराहे से अलीगंज मोड़ तक डिवाइडर का कार्य चल रहा है। इस मार्ग से रोजाना 40 हजार से ज्यादा लोग सफर करते हैं। बिना सड़क चौड़ी किए ही बन रहे डिवाइडरों से सड़क संकरी हो गई है। इससे भारी वाहन आ जाने से छोटे वाहनों को सड़क के नीचे चलने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इससे कहीं गिट्टी से छिटककर तो कहीं गड्ढे में गिरकर लोग हादसाें का शिकार हो रहे हैं। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता राजेंद्र वर्मा ने कहा कि एनओसी न मिलने के कारण पेड़ों की कटाई नहीं हो सकी है। इससे फोरलेन निर्माण कार्य में रुकावट आ रही है। एनओसी लेने की प्रक्रिया चल रही है। मिलने के बाद कार्य तेज गति से शुरू करा दिया जाएगा। जहां डिवाइडर बन रहे हैं, वहां वाहन चालक धीमी गति से वाहन चलाएं, जिससे कोई हादसा न हो।