जिला जेल में उपद्रव के कारणों की जांच का निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। जिला प्रशासन और जेल के उच्चाधिकारी अलग-अलग जांच में मूल वजह तलाशने में जुटे हैं। इस बीच सोशल मीडिया में उपद्रव के दिन का एक वीडियो वायरल हुआ है। इसमें जेल के अंदर मौजूद बंदी बाउंड्री के बाहर खड़े लोगों से चीख-चीख कर वहां की अनियमितता की कहानी बता रहा है। बंदी की बातों पर गौर करें तो जेल मैनुअल की धज्जियां उड़ाते हुए यहां वह सब कुछ हो रहा है, जिस पर शासन की सख्त मनाही है।
इस बंदी के मुताबिक जेल की कैंटीन लूट का अड्डा है। यहां से बंदियों को सौ से डेढ़ सौ रुपये किलो पर आलू और प्याज मिलता है। कोहड़ा-लौकी भी 130 रुपये किलो है। पनीर के लिए 500 रुपये किलो भुगतान करना होगा। 20 किलो दाल में एक हजार से अधिक बंदियों-कैदियों को खाना परोसा जाता है। दाल इतनी पतली होती है कि उसमें सिर्फ हल्दी और पानी ही नजर आता है। बंदी आरोप लगा रहा था कि अगर कोई इसका विरोध करता है तो उसकी बर्बरता पूर्वक पिटाई की जाती है। ऐसे ही एक बंदी आनंद को पीटकर मरणासन्न कर दिया गया है। वायरल वीडियो में बंदी यह भी कह रहा है कि जेल के अस्पताल में कोई दवा-उपचार नहीं होता। तबीयत बिगड़ती रहती है, लेकिन जिम्मेदार बस टालते रहते हैं। बाद में बंदी की मौत होने पर उसे रेफर कर यह कहा जाता है कि रास्ते में मौत हुई। बागेश की मौत भी ऐसे ही हुई है। निरीक्षण में आने वाले अफसरों से शिकायत करते हैं तो वह भी बस सुनकर चले जाते हैं। कोई कुछ नहीं करता। इसलिए मजबूरन बंदी-कैदी आक्रोशित हो गए हैं, ताकि उनकी बात को सुनने के लिए आला अधिकारी यहां आएं। जेल अधीक्षक एसके पांडेय का कहना है कि जेल मैनुअल के अंतर्गत ही बंदियों को सुविधाएं दी जाती हैं। कैंटीन में हर सामान का रेट तय है। जिन बंदियों की मनमानी नहीं चल पाती, वही झूठे आरोप लगाते हैं। वायरल वीडियो के बारे में कोई जानकारी नहीं है। जांच करने के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकता है।