जफराबाद। फोरलेन बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद चार वर्ष से मुआवजा मिलने का इंतजार कर रहे किसानों का चेहरा सोमवार को खिल उठा। सीआरओ के नेतृत्व में बैंक कर्मी और एनएचएआई के अधिकारियों ने हौज गांव स्थित डीएवी कॉलेज में कैंप लगाकर किसानों के अभिलेखों की जांच की। किसानों का दूसरा खाता खोला गया, ताकि उनके खाते में आरटीजीएस के माध्यम से शीघ्र पैसा भेजा जा सके।
वाराणसी-लखनऊ राजमार्ग निर्माण में हौज, मड़ैया, मतुलापर व गद्दीपुर आदि गांव के 135 किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई थी। अधिग्रहण के पहले कुछ किसानों ने सरकारी भीटा, बंजर, पोखरा आदि की भूमि गलत तरीके से अपने नाम पर करवा दिया था। उन लोगों को मुआवजे के लिए वर्ष 2016 में सरकारी धन भी स्वीकृत हो गया था। जब इसकी जानकारी प्रशासन को हुई तो ऐसे किसानों को दिए जाने वाला मुआवजा रोक दिया गया। मामला कोर्ट में चला गया। इस दौरान 135 किसानों का पांच करोड़ से ज्यादा रुपया रुक गया, जिसे लेकर किसान काफी परेशान थे। इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम के निर्देश पर सोमवार को सीआरओ राजकुमार द्विवेदी ने एनएचएआई भारत सरकार के सलाहकार विजय शंकर सिंह सहित एचडीएफसी बैंक के अधिकारी व राजस्व विभाग की टीम के साथ हौज गांव स्थित डीएवी कॉलेज में किसानों को मुआवजा देने के लिए कैंप लगाया। इस दौरान बैंक ने किसानों का दूसरा खोला, जिससे उनके खाते में मुआवजा की धनराशि भेजी जा सके।