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देश विदेश में अपनी पहचान बनाने का जज्बा है गांव की खासियत

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15- गांव हमारी ताकत थानागद्दी क्षेत्र के उमरवार गांव स्थित राम जानकी मंदिर। - फोटो : JAUNPUR
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थानागद्दी। केराकत क्षेत्र का उमरवार गांव को लोगों ने तालीम को तरक्की का जरिया बना लिया। आज दुनिया भर में यहां के मेधावी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। शिक्षा से लगायत रक्षा सेवा तक में इस गांव के लोगों को उच्च पदों पर देखा जा सकता है। गांव में साक्षरता की स्थिति भी बेहतर है।
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बरैछाबीर, गोबरा, बरामनपुर, जमुआ और महुली की सीमा से सटा यह गांव जिला मुख्यालय से 42 किमी पूरब स्थित है।
उमरवार खास, नरपतिया, भदवार कदमा, कुटीपर और परसादीपुर आदि छह मजरों में बसा यह गांव 201 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें महज 168 हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है। गांव के कुल 557 परिवारों की 6500 आबादी है। गांव में अनुसूचित जाति की आबादी 1750 है। 2850 मतदाताओं वाले इस गांव में हरिजन, यादव, ब्राह्मण, क्षत्रिय, मौर्य, लोहार, कोहार, कहार, पाल, माली, नाई, मुसहर, धोबी, कायस्थ और मुस्लिम वर्ग के लोग हिलमिलकर रहते हैं। गांव के सभी वर्ग के लोगों ने तालीम को तरक्की का जरिया बना है। नतीजा यह है कि कई घरों के सभी सदस्य सरकारी नौकरी हैं, जिनमें कई उच्च पदों पर हैं।
साहित्यकार डॉ बच्चन सिंह के बेटे डॉ सुरेंद्र प्रताप सिंह काशी विद्यापीठ वाराणसी में हिंदी के विभागाध्यक्ष रहे जबकि उनके दूसरे पुत्र राजीव सिंह दिल्ली के मास कम्युनिकेशन के डायरेक्टर है। राजीव की पत्नी डॉ संध्या सिंह एनसीईआरटी में प्रोफेसर है। प्रवक्ता रहे रामाज्ञा सिंह के बड़े बेटे डा. महेंद्र प्रताप सिंह सहायक चिकित्सा निदेशक रहे और छोटे बेटे डॉ. राकेश सिंह देवीपाटन मंडल के डीआईजी हैं। पौत्र डॉ सौरभ सिंह टोबैको कंट्रोल यूनिट वाराणसी के प्रभारी है। मनीष सिंह मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग में प्रोजेक्ट अफसर हैं। डॉ श्याम बिहारी सिंह कानपुर विश्वविद्यालय में क्लीनिकल सायकोलॉजी के विभागाध्यक्ष थे। उनके बेटे डॉ विनोद सिंह भोपाल में लाइफ साइंस के प्रोफेसर और बहू डॉ पूनम सिंह क्लिनिकल साइंस की प्रोफेसर है। बीएचयू में भूगोल के प्रोफेसर रहे डॉ जगदीश सिंह ने समय समय पर इंग्लैंड जापान कीनिया और हंगरी में जाकर देश की सांस्कृतिक खुशबू बिखेरी। दूसरे भाई लालसाहब सिंह रीवा विश्विद्यालय के कुलसचिव है। तीसरे भाई डॉ चंद्रप्रकाश सिंह यूपी कालेज में भूगोल के प्राध्यापक रहते हुए नैरोबी की शैक्षिक यात्रा की।इंजीनियर अभिषेक सिंह ने अमेरिका अबूधाबी इजिप्ट और नाइजीरिया में अपनी सेवाएं दी है। प्रवक्ता सूबेदार के प्रवक्ता बेटे अमरेंद्र के पुत्र शशांक सिंह होटल मैनेजमेंट की डिग्री हासिल कर इंग्लैंड में अपना हुनर दिखा रहे है। दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर डॉ विद्याशंकर सिंह के पुत्र मंजुल एवं राहुल अमेरिकन कम्पनी में डायरेक्टर है।शुभम ओमान तो रोहन स्विट्जरलैंड में आईटी सेक्टर में धूम मचाये है।
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विंग कमांडर रहे घनश्याम गुप्त की एक पुत्री शोभना वायु सेना में फ्लाइंग आफिसर है तो दूसरी शालिनी स्विट्जरलैंड में इंजीनियर है और तीसरी कबिता गुप्ता बैंक मैनेजर है। राजकुमार शर्मा मध्यप्रदेश में शिक्षाधिकारी है तो प्रमोद यादव रिजर्ब बैंक में कार्यरत है। प्राचार्य पंडित राजाराम शास्त्री के बेटे डा बागीश्वर शुक्ल सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य रहे। राकेश व स्वतन्त्र कुमार उत्तराखंड में प्रिंसिपल है। राजस्व रेलवे एवं बैंकिंग क्षेत्र के साथ ही खेल जगत में पंडित बनारसी पहलवान झिंगुरी पहलवान पन्ना पहलवान रिंकू पहलवान और मुसाफिर सिंह ने नाम कमाया तो लोक भाषा और लोक संस्कृति के गायन एवं रचना में नटवर यादव और परमा यादव का नाम लोंगो की जुबान पर है। राजेन्द्र प्रसाद यादव हिंदी पद्य रचना में अपनी छाप छोड़ने में सफल हो रहे है। साधारण परिवार में जन्मे हर्ष शर्मा को हाई स्कूल की परीक्षा में सर्वोच्च अंक मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी वर्ष सम्मानित किया है।
15 मंदिर एवं एक गांव में है मस्जिद
थानागद्दी। गांव में छोटे बड़े कुल 15 मंदिर और एक मस्जिद है। राम जानकी मंदिर हमेशा आस्थावानों से गुलजार रहता है। गांव में 14 ट्रैक्टर है। सिचाई निजी नलकूपों से होती है। सभी प्रकार की फसलें बोई जाती है। कुंए अर्थहीन हो गए है। पेयजल के लिए 45 इंडिया मार्का हैंड पम्प लगे है। तीन प्राइमरी एवं एक जूनियर और एक प्राइवेट स्कूल है।सम्पर्क मार्ग प्रत्येक पुरवे में है।मोढ़ेला थानागद्दी मुख्य मार्ग के दोनों तरफ बसने से गांव में बाजार भी है। उन्नत कृषि व्यवसाय और नौकरी पेशा के बल पर इस गांव के लोंगो का जीवन बेहतर है।
हर क्षेत्र में गांव के लोगों का है परचम
प्रख्यात हिंदी समालोचक एवं शिमला विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर रहे डॉ बच्चन सिंह पं. राजाराम शास्त्री और डॉ बागीश्वर शुक्ल जैसी शख्सियत ने साहित्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय फलक पर इस गांव को पहचान दिलाई है। शिक्षा क्षेत्र और सैन्य सेवा इस गांव के लोंगो की पहली पसंद रहा है। इस गांव के युवाओं के जोश जज्बे और जुनून का परिणाम रहा है कि कर्नल राम अवध कुशवाहा विंग कमांडर, घनश्याम गुप्त डीआईजी, राकेश सिंह फ्लाइंग आफिसर, लालता मौर्य और शोभना गुप्ता ने राष्ट्र रक्षा का क्षेत्र चुना। अच्छी तादात में यहां के सपूत थल, जल, वायु सेना सहित पुलिस और बीएसएफ में शामिल होकर देश की निगहबानी में लगे हुए है।
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