जौनपुर। बदलते मौसम से बच्चे निमोनिया और डायरिया की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। करीब 60 फीसदी बीमार बच्चे जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। निमोनिया के साथ डायरिया की समस्या बच्चों की सेहत को बिगाड़ रहा है। जिला अस्पताल में 100 बच्चे रोज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप सिंह ने कहा कि मौसम बदलने के साथ ही बच्चों में निमोनिया का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। बच्चों की पसली तेजी से चलने लग रही है, सांस लेने में परेशानी हो रही है। कुछ बच्चों में तो शरीर भी नीला पड़ने लगता है। निमोनिया और डायरिया की चपेट आए बच्चों की गंभीरता को पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) और वेंटिलेटर पर रखना पड़ रहा है। शून्य से तीन साल के बच्चों में ज्यादा समस्या देखने को मिल रही है। बदल रहा मौसम बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक है। इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। हर दिन 20 से 25 बच्चे इमरजेंसी में इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें 15 से 20 बच्चों को निमोनिया और डायरिया की वजह से भर्ती करने की स्थिति आ जाती है।
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निमोनिया से बच्चों को होती है परेशानी
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुक्ला ने बताया कि निमोनिया में जकड़न से बच्चे ठीक तरीके से दूध नहीं पी पा रहे हैं, खाना खाने में भी दिक्कत होती है। दूध पिलाने और खाना जबरदस्ती खिलाने पर बच्चों को खांसी आती है, तो दूध या खाना सरक कर फेफड़ों में चला जाता है। फेफड़ों में जाने का डर रहता है। ऐसे बच्चों को नियो नेटल केयर यूनिट (एनआईसीयू) में भर्ती करना पड़ रहा है।
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निमोनिया के लक्षण
बच्चों को पसीना आना, ठंड के साथ बुखार आना, सीने में जकड़न, सीने से खरखराहट, सांस लेने में बच्चों को दिक्कत, जल्दी-जल्दी सांस चलना, कफ और खांसी के साथ पीला बलगम निकलना निमोनिया के लक्षण हो सकते हैं। यदि यह लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखा कर उपचार शुरू कर दें।
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बच्चों में निमोनिया से ऐसे करें बचाव
थोड़ी सी सावधानी बरत कर बच्चों को निमोनिया से बचाया जा सकता है। बच्चों को पैदा होने के बाद फ्लू का टीका जरूर लगवाएं। नियमित टीकाकरण में निमोकॉकल वैक्सीन, पीसीवी 13, हीमोफिलिस इन्फलुएंजा वैक्सीन लगवाने से बच्चों में निमोनिया का खतरा कम हो जाता है।