सागर विश्वविद्यालय मप्र के प्रो. वीके दीक्षित ने कहा कि आज औषधि में शोध की बेहद जरूरत है। क्योंकि आज इनका उपयोग अधिक रूप में किया जा रहा है। यह कई जटिल बीमारियों मेें बेहद कारगर होती हैं।
उन्होंने आम जन को दृष्टिगत रखते हुए सुरक्षित एवं कम मूल्य पर दवा उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर ध्यान आकृष्ट किया। वह बुधवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में फार्मेसी संस्थान की ओर से
आयोजित रिसेंट ट्रेंड्स इन फार्मास्यूटिकल साइंसेज (औषधि विज्ञान में नवीन प्रवृत्तियां) विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि निश्चित मात्रा एवं सही समय पर औषधि के उपयोग से जटिल से जटिल रोग का उपचार हो सकता है। शोधार्थियों से उन्होंने अपील की कि ऐसे औषधियों को प्रभावी बनाया जाए जिससे मानव शरीर पर उसका दुष्प्रभाव न पड़े।
अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि यह सदी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रयोगशाला की स्थापना पर बल देते हुए कहा कि अभी भी दवाओं के परीक्षण की उपलब्धता बहुत कम है।
जिसके चलते सही दवा के गुणवत्ता की पहचान समय पर नहीं हो पाती। इसलिए दवा के क्षेत्र में लगातार शोध और परीक्ष्ाण्ा का किया जाना जरूरी है।
इससे पहले विश्वविद्यालय के छात्रों ने सरस्वती वंदना और कुलगीत प्रस्तुत किया। संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन कुलपति एवं मुख्य अतिथि द्वारा किया गया। फार्मेसी संस्थान के निदेशक प्रो. एके श्रीवास्तव ने स्वागत किया।
डा. राजीव कुमार ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डा. एचसी पुरोहित किया जबकि आभार डा. धर्मेंद्र सिंह ने जताया। इस मौके पर कु लसचिव डा. बीके पांडेय, प्रो. बीबी तिवारी, डा. एके श्रीवास्तव, डा. अविनाश पार्थडिकर,
डा. एसपी तिवारी, डा. राजेश शर्मा, डा. कार्तिकेय शुक्ला, डा. मनोज मिश्र, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. सुनील कुमार, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. केएस तोमर, फार्मेसी संस्थान के पूर्व निदेशक एवं बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रो. वीके सिंह, वाराणसी कालेज ऑफ फार्मेसी के निदेशक डा. ओपी तिवारी, हरिश्चंद्र पीजी कालेज वाराणसी के प्रो. प्रदीप कुमार रहे।