शहर की कालोनियों में लोगों की छतों पर लगे मोबाइल टॉवर।
संचार कंपनियों ने नियम और कानूनों को धता बताते हुए शहर की रिहायशी कालोनियों में मोबाइल टॉवरों का जाल बिछा रखा है। कारोबार को बढ़ाने और अपने मुनाफे के चक्कर में कंपनियों का मानों लोगों की सेहत से कोई लेना देना नहीं है।
चिकित्सक मानते हैं कि मोबाइल टॉवरों से होने वाले रेडिएशन का मानव जीवन पर बुरा असर पड़ता है। ब्रेन ट्यूमर और कैंसर तक का खतरा बढ़ जाता है। बावजूद इसके शहर के रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से मोबाइल टावर अभी भी लगाए जा रहे हैं।
नगर मजिस्ट्रेट उमाकांत त्रिपाठी की मानें तो उनके कार्यालय से किसी भी संचार कंपनी ने शहर के रिहायशी इलाके में टॉवर लगाने के लिए कोई अनुमति नहीं ली है। बिना अनुमति के लगाए गए सभी मोबाइल टॉवर अवैध हैं। कार्यालय से मोबाइल टॉवरों की स्थापना के लिए कोई अनुमति जारी नहीं की गई है।
नियम की बात करें तो मोबाइल या बेसिक टेलीफोन के टॉवर के निर्माण की अनुमति पार्क, बंजर, अविकसित एवं खुले स्थल, कृषि भू उपयोग आदि के अंतर्गत दी जाती है जबकि अन्य भू उपयोगों में सक्षम प्राधिकारी/विकास प्राधिकरण बोर्ड विशेष परिस्थितियों में अनुमति देते हैं। लेकिन उक्त संस्थाओं से अनुमति नहीं ली गई। अभियान चलाकर कार्रवाई होगी।