जौनपुर। ऐतिहासिक शाही किला को पर्यटकों के लिए और मनोहारी बनाने की तैयारी है। किले की यादों को चुनार के पत्थरों पर अंकित करने के लिए खाका तैयार हो रहा है। बाउंड्री को पत्थरों के पिलर से सुरक्षित करने के साथ ही पर्यटकों के लिए पेयजल आदि की सुविधाएं बढ़ाने की योजना भी बनाई जा रही हैं। डीजी कार्यालय दिल्ली के पोर्टल पर सूचना भेज दी गई है।
शाही किला जुड़ी जानकारियां अभी लोहे के बोर्ड पर अंकित है। अब उसे पत्थर पर अंकित किया जाएगा। इसके लिए चुनार से पत्थर मंगाए गए हैं। किले के ऊपरी हिस्से में गोमती नदी के छोर पर क्षतिग्रस्त चहारदीवारी को भी चुनार के पत्थर के पीलर से सुरक्षित किया जाएगा।
शाही किले का निर्माण चुनार के पत्थरों से हुआ है। किले की दीवार से लेकर गुंबद तक के सभी पत्थर चुनार के ही लगे हैं। किले की मैचिंग खराब न हो इसे देखते हुए चुनार से ही पत्थर मंगाया जा रहा है। ताकि इन्हें जहां लगाया जाए वह स्थान किले के दूसरे हिस्से से अलग न दिखे। किला के भीतर पेयजल के लिए आरओ मशीन के साथ ही पर्यटकों को पेयजल की सुविधा जगह-जगह टोटी भी एनटीटी सीसी कंपनी ने लगया है। टोटी खराब होने की सूचना भी डीजी कार्यालय के पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। डीजी कार्यालय से ही निर्देश के बाद इसकी मरम्मत कराई जाएगी। किले के संरक्षण सहायक जे राजू ने बताया कि किले को पर्यटकों के लिए और मनोहारी बनाने के लिए डीजी कार्यालय दिल्ली को प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया है।