जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध अनुदानित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित शिक्षकों को शोध गाइड बनाने का मामला विद्या परिषद में उठेगा। विश्वविद्यालय ने पूर्व कुलपति प्रो राजाराम यादव के समय में 2018 में स्ववित्तपोषित शिक्षकों को शोध गाइड बनाया था। चार साल बाद विद्यालय परिषद ने निरस्त कर दिया।
शोध गाइड बनने के बाद शिक्षकों को 4-4 छात्र एलाट कर दिए गए थे। लेकिन कुलपति बदलने के बाद 2022 में नई कुलपति के रूप में प्रो निर्मला एस मौर्या ने कार्यभार ग्रहण किया। नए कुलपति के आने के बाद पूर्व में हुए विद्यापरिषद के आदेश को खत्म कर शिक्षकों को शोध गाइड बनने से रोक दिया गया।
पूर्व कुलपति निर्मला एस मौर्या का कार्यकाल 2022 में पूरा हो गया। इस दौरान शिक्षक अपने अधिकारों की मांग करते रहे लेकिन कुलपति ने टालमटोल कर मामले का टरका दिया। उनके जाने के बाद वर्तमान कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कार्यभार संभाला तो शिक्षकों ने मुलाकात कर अपनी बात रखी लेकिन कोई हल नहीं निकला।
अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ सुशील कुमार मिश्र के नेतृत्व में शिक्षकों का प्रतिनिधि मंडल 26 नवंबर को कुलपति से मिलकर अपनी बात रखी। कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने मामले को विद्यापरिषद में रखने का आश्वासन देकर शिक्षकों को शांत करा दिया।
शिक्षक संघ ने 10 दिसंबर को कुलपति से फिर मिलकर अपनी बात रखी और 18 दिसंबर को आंदोलन की चेतावनी दी। शिक्षकों के कड़े रुख को देखते हुए कुलपति ने 18 दिसंबर से पहले ही कुलपति ने शिक्षक संघ को बुलाकर बात की और आंदोलन न करने को कहा। कुलपति के आश्वासन के बाद शिक्षक संघ ने आंदोलन का निर्णय वापस ले लिया।
शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार मिश्र का कहना है कि शोध गाइड बनाकर सूची जारी करने की मांग की गई। यदि 30 दिसंबर तक विवि प्रशासन कोई निर्णय नहीं लेता है तो शिक्षक संघ अगला कदम उठाने को बाध्य होगा।