रोशनी का पर्व दीपावली नजदीक है। जहां विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक झालरों की मांग है, वहीं मिट्टी के दीये भी लोगों की पसंद बने हुए हैं। इसके मद्देनजर स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने 15 हजार दीये बनाने का लक्ष्य तय किया है। यहां के दीये मुंबई, अयोध्या, बिहार, लखनऊ, हरदोई, वाराणसी तक के दुकानदारों ने मांग की है।
दीपावली 31 अक्तूबर को मनाई जाएगी। ऐसे में जहां विभिन्न रंगों के झालरों से भवन और प्रतिष्ठान जगमग होने लगे हैं, वहीं समूहों की महिलाओं ने मिट्टी के दीये से इस दिवाली को रोशन करने की तैयार कर ली है। इस दिवाली समूह से जुड़ी महिलाओं के हाथों बनाए गए दीयों से महानगरों के अशियाने रोशन होंगे। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। समूह की महिलाओं की तरफ से मोम वाले विशेष दीये बनाए जा रहे हैं। इन दीयों को नगर और गांव के अलावा महानगरों में भी भेजा जाएगा।
दीपावली और धनतेरस को लेकर लोग उत्साहित हैं। लोग अभी से अपने घर आंगन को प्रकाशित करने के लिए विभिन्न प्रकार के रंगों वाले झालरों, रंग-बिरंगे बल्ब, मिट्टी के बने दीये की मांग कर रहे हैं। अधिसंख्य लोगों की पसंद स्वदेशी सामान हैं, जो पूर्वजों के समय से उपयोग किए जा रहे हैं। लोगों की मांग पूरी करने के लिए मिल्की स्वयं सहायता समूह जलालपुर की महिलाओं ने 10 रुपये वाले दीये तैयार किया है। इन दीयों में मोम की जमावट है। यह करीब डेढ़ घंटे तक जलेगा। करीब 10 हजार पीस दीये समूह की महिलाओं ने तैयार किया है। बदलापुर और जौनपुर में विकास भवन समेत अन्य जगहों पर भी स्टॉल लगाए जाएंगे।
समूह की अध्यक्ष जफरून इजाज ने बताया कि मोम से बने दीये की प्रदेश के बाहर भी मांग है। मुंबई में 1000, अयोध्या में 1200, आजमगढ़ में 1000, बिहार में 1500, वाराणसी में 2500, लखनऊ में 1000, गाजीपुर में 1000 मोम से बने दीये की मांग की गई है। जल्द ही इन सभी जगहों पर दीये भेज दिए जाएंगे।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक शोभी गौर ने बताया कि मिल्की स्वयं सहायता समूह की 11 महिलाएं दीये में मोम और बाती लगाने के कार्य में जुटी हैं। अब तक 10 हजार दीये तैयार कर लिए गए हैं। करीब पांच हजार दीये और तैयार किए जा रहे हैं। कुल 15 हजार दीये बनाने का लक्ष्य है।