फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gold Loan Fraud: जिस सोने पर दिया 17 लाख का लोन, बाद में उसी को बताया जीरो कैरेट का; पढ़ें- पूरा मामला

Sat, 05 Jul 2025 10:42 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।

सार

Jaunpur News: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां बैंक ने जिस सोने के गहने पर 17 लाख रुपये का लोन दिया। बाद में उसी गोल्ड को जीरो कैरेट का बता दिया गया। 
विज्ञापन
फ्रॉड। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गोल्ड लोन मामले में धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में सीजेएम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता यादव ने 26 जून को जफराबाद थानाध्यक्ष को पांच बैंक अधिकारियों और एक ज्वेलर्स प्रोपराइटर के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन


ये है पूरा मामला
कोतवाली के हुसैनाबाद निवासी वादी विक्रांत सिंह ने कोर्ट में अधिवक्ता प्रशांत उपाध्याय के माध्यम से प्रार्थना पत्र दायर किया। उन्होंने बताया कि वह मेडिकल एजेंसी संचालित करते हैं। वर्ष 2022 में व्यवसाय के लिए एक बैंक की कजगांव शाखा से संपर्क किया। बैंक के गोल्ड अप्रेजर ने उनके सोने की जांच की और 22 कैरेट बताया, इसका प्रमाणपत्र वादी के पास है। इसी आधार पर 17 लाख रुपये का लोन स्वीकृत किया गया। 

25 लाख का सोना हड़पने का आरोप
सोना बैंक में गिरवी रखा गया। बाद में 20 जनवरी 2023 को, बिना सूचना दिए, उसी सोने का दोबारा मूल्यांकन कराया गया। इस बार सोने को जीरो कैरेट बताया गया और वादी को लोन की पूरी राशि ब्याज सहित जमा करने को कहा गया। दबाव में आकर वादी ने 10 फरवरी को भुगतान कर दिया। वादी का आरोप है कि बैंककर्मियों ने मिलकर कूटरचना और जालसाजी से उनका 25 लाख रुपये मूल्य का सोना हड़प लिया। सोना वापस मांगने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। 
विज्ञापन
विज्ञापन

इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश

इस मामले में एक बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक, उप शाखा प्रबंधक, सीनियर मैनेजर, तत्कालीन शाखा प्रबंधक, मुख्य शाखा प्रबंधक के जरिए मानव संसाधन विभाग व वाराणसी के वंदना ज्वेलर्स के प्रोपराइटर राकेश सेठ के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। जिस पर कोर्ट ने कहा कि सोना बैंक के कब्जे में ही था, फिर भी शुद्धता पर सवाल उठना संदेहजनक है। मामले की जांच कर सच्चाई सामने लाना आवश्यक है। इस आधार पर पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया गया है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें