फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का प्रतीक है : राधेश्याम पाराशर

विज्ञापन
मड़ियाहूं के ग्राम पंचायत बदौआ में श्रीमद् भागवत कथा सुनाते कथावाचक राधेश्याम महाराज। संवाद
विज्ञापन
मड़ियाहूं। ग्राम पंचायत बदौआ में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथा व्यास श्रीराधेश्याम महाराज पाराशर ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता, राजा परीक्षित के उद्धार तथा श्राप से मुक्ति की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा व्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। सुदामा जब अपनी पत्नी के आग्रह पर श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे तो भगवान ने अपने बालसखा का राजसी वैभव के बीच भी उसी आत्मीयता से स्वागत किया। उन्होंने सुदामा के चरण धोकर मित्रता की मिसाल प्रस्तुत की। कथा में बताया गया कि सुदामा ने भगवान से कुछ नहीं मांगा, लेकिन श्रीकृष्ण ने उनकी स्थिति को समझकर उनका जीवन सुख-समृद्धि से भर दिया। उन्होंने राजा परीक्षित के उद्धार और उन्हें मिले श्राप से मुक्ति का प्रसंग भी सुनाया। कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति मिलती है और उसे जीवन में सद्कर्म करने की प्रेरणा मिलती है। अंतिम दिन कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भजन-कीर्तन और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी, प्रेम नारायण यादव बाबा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें