हरिहरपुर की रामलीला में सुग्रीव व अंगद के साथ श्रीराम। संवाद
डोभी। ‘सखा सोच त्यागहू बल मोरे, सब विधि घटब काज मैं तोरे।’ रामचरितमानस की इस चौपाई के माध्यम से प्रभु श्रीराम ने सुग्रीव को भरोसा दिलाया कि मित्रता निभाते हुए वे उनके सभी कष्ट दूर करेंगे। इसी प्रसंग को बृहस्पतिवार को डोभी क्षेत्र के हरिहरपुर में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला में जीवंत किया गया। कलाकारों ने राम-सुग्रीव मित्रता और बाली वध की लीला का भावपूर्ण मंचन कर दर्शकों का मन मोह लिया। हरिहरपुर की रामलीला करीब तीन सौ साल पुरानी है। यहां नवरात्र की अष्टमी को मुकुट पूजा के साथ रामलीला का शुभारंभ होता है। विभिन्न प्रसंगों के मंचन के बाद शरद पूर्णिमा पर विशाल मेले के बीच रावण वध के साथ इसका समापन होता है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। मंचन में दिखाया गया कि भाई बाली के पराक्रम से भयभीत सुग्रीव अपनी व्यथा प्रभु श्रीराम को सुनाते हैं। वह बताते हैं कि बाली को युद्ध के लिए ललकारना उनके लिए कठिन है। बाली द्वारा उनकी पत्नी का हरण किए जाने से भी वह दुखी हैं। सुग्रीव की व्यथा सुनकर श्रीराम उन्हें मित्रता का भरोसा दिलाते हैं। वह कहते हैं कि अब सुग्रीव के संकट उनके अपने संकट हैं। इसके बाद श्रीराम बाली का वध कर सुग्रीव को उनके कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं। संवाद