मछलीशहर ब्लाक के अमारा गांव में उपेक्षित पड़ा खेल का मैदान। संवाद
जौनपुर। युवाओं की सेहत और प्रतिभा निखारने के लिए हर ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत खेल मैदान बनाने की योजना जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है। जमीनी पड़ताल में सामने आया कि जिले के 171 गांवों में अब तक मैदानों का निर्माण ही नहीं हो सका है। वहीं, जिन गांवों में कागजों पर मैदान दर्ज हैं, वहां रखरखाव के अभाव में झाड़-झंखाड़ और गड्ढों का बोलबाला है। सुविधाओं और साफ-सफाई के अभाव में युवा खाली खेतों या जान जोखिम में डालकर सड़क की पटरियों पर अभ्यास करने को मजबूर हैं। मछलीशहर की 92 ग्राम सभाओं में से 65 में पिछले साल मैदान बने थे, लेकिन आज वे उपयोग के लायक नहीं हैं। स्थानीय युवाओं (अभिषेक दुबे और सोनू यादव) का कहना है कि पर्याप्त व्यवस्था न होने से मजबूरी में सड़कों पर दौड़ लगानी पड़ती है। सुइथाकलां : जहुरुद्दीनपुर, सलेमपुर और खानपुर चौरवा जैसे क्षेत्रों के मैदान घास और गड्ढों से पटे हैं। डीसी मनरेगा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले के 21 ब्लॉकों में 1740 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से 1569 ग्राम पंचायतों में खेल मैदान बन गए हैं। 171 ऐसे गांव हैं जहां आज तक खेल मैदान के लिए जमीन तक नहीं मिली तो कुछ जगहों पर विवाद है।