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सीने से मासूमों को चिपकाए मीलों सफर कर घर पहुंचा दंपती

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मुंगराबादशाहपुर। पैरों में छाले और बच्चों को सीने से लगाए पति-पत्नी लड़खड़ाते कदमों से पैदल ही घर की ओर बढ़ते जा रहे थे। चिलचिलाती धूप उन्हें बेकल कर रही थी लेकिन जल्द घर पहुंचने की ललक खींच रही थी। इस तरह सात दिनों में उन्होंने मुंबई से बदलापुर तक की दूरी तय ली। हाल पूछने पर उनकी आंखों से आंसूओं की धार फूट पड़ी। होठ हिले तो यही सवाल था कि आखिर हमारा कसूर क्या था जो सरकार जिंदगी को नरक बना दी।
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जौनपुर जिले के ग्राम रामपुर बदलापुर निवासी अरविंद कुमार नवी मुंबई में रहकर राजमिस्त्री का काम करते हैं। उनका छोटा सा परिवार पत्नी शशिकला, दो पुत्री अनुष्का (3) व आरूषी (1) भी उनके साथ वहीं रहता था। लॉक डाउन हुआ तो काम मिलना बंद हो गया। चोरी छिपे कुछ काम मिल जाता तो पेट की आग बुझती। लॉक डाउन की मियाद बढ़ी तो परेशानियों ने पैर पसार लिया। दाने-दाने को मोहताज हो गए। दो बच्चे भी भूख प्यास से बेहाल हो जाते। कुछ लोगों से थोड़ा कर्ज लेकर बच्चों के दूध और कुछ खाने का इंतेजाम हुआ, मगर जब हालात और बिगड़ने लगे तो घर लौटना ही मुनासिब समझा। कई दिन भूखे पेट सोए। घर आने के लिए कुछ जगह ट्रकों का सहारा मिला तो मीलों पैदल भी चलना पड़ा। मां अनुष्का को तो पिता आरूषी को सीने से लगाए उम्मीदों और बेबसी का सफर लगातार करते रहे हैं। करीब एक सप्ताह पहले निकला परिवार रविवार को मुंगराबादशाहपुर बार्डर पर पांडेयपुर पहुंचा। लोगों ने किसी तरह उन्हें वाहन पर बैठाकर आगे रवाना किया।
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