जलालपुर के मोजरा गोपालपुर में चल रही नौ दिवसीय श्री राम कथा के दौरान निकाली गई झांकी। संवाद
जलालपुर। मोजरा गांव में आयोजित श्री रामकथा में कथावाचक ने भगवान श्रीराम और माता जानकी के विवाह की कथा का मनोहारी वर्णन किया। धनुष टूटते ही जय श्रीराम के जयकारे के साथ राम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ। कथावाचक संत पुरुषोत्तम दास महाराज ने कहा कि राजा जनक की सभा में कोई भी बलशाली राजा शिव के धनुष को हिला तक नहीं सका, तब जनक हताश हो गए। ऐसे में गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर प्रभु श्रीराम उठे और उन्होंने सहज ही धनुष उठा ली। उन्होंने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई, वह दो टुकड़ों में टूट गया। शिवजी का वह धनुष दरअसल मनुष्य के भीतर छिपे अहंकार का प्रतीक था। जब तक संसार में अहंकार रहेगा, तब तक परमात्मा से मिलन असंभव है। प्रभु श्रीराम ने धनुष तोड़कर यह संदेश दिया कि जहां अहंकार का नाश होता है, वहीं जीव और ब्रह्म का मिलन होता है। कथा सुनने के लिए पंडाल में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान राम के शिव धनुष तोड़ने के प्रसंग पर समूचा पंडाल जय श्रीराम और हर-हर महादेव के जयकारे से गूंज उठा। महाआरती के बाद भक्तों के बीच प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर मुख्य आयोजक सतीश दुबे, मनोज दुबे व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में जुटे थे। मुख्य यजमान सुभाष चंद्र दुबे, ताड़क नाथ दुबे, प्रवीण दुबे ने व्यासपीठ का पूजन किया।