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टेस्ट, ट्रैक और ट्रीटमेंट की सुविधा सिर्फ मुख्यालय पर

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जौनपुर। कोरोना से जिले में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। रोजाना नए मरीजों की बढ़ती तादाद से सरकारी तंत्र हांफ रहा है। मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के दावों की पोल खुल रही है। बावजूद प्रधानमंत्री के टेस्ट, ट्रैक और ट्रीटमेंट के मंत्र पर प्रभावी रुप से अमल नहीं हो पा रहा। यह व्यवस्था अभी सिर्फ जिला मुख्यालय पर ही है। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति बदहाल है। तहसील मुख्यालयों पर न तो कोविड अस्पताल है और न ही उपचार का इंतजाम। कई स्थानों पर टेस्ट की प्रक्रिया भी बस कोरम पूरा करने वाली है। करीब 56 लाख की आबादी वाले जिले में अब तक एक एल-2 अस्पताल ही चालू है। जिला महिला अस्पताल के एमसीएच विंग में स्थापित एल-2 अस्पताल में बस सौ बेड हैं। मंगलवार से मटियारी में 225 बेड का एल-1 अस्पताल शुरू हुआ, मगर अभी यहां मरीज नहीं रखे गए हैं। आपात सेवा के लिए जिन 12 निजी अस्पतालों को प्रशासन ने अधिग्रहित किया है, उसमें भी भर्ती अभी शुरू नहीं हुई है। उन्हें बस नोटिस मात्र ही थमाई गई है। कुल मिलाकर सौ बेड के अस्पताल के भरोसे ही पूरे जिले के कोरोना मरीजों को स्वस्थ करने का दावा चल रहा है। संसाधनों की इस कमी के कारण ही मरीजों को प्रभावी ढंग से इलाज नहीं हो पा रहा। नतीजा रोजाना लोग दम तोड़ रहे हैं। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय तक आने से पहले ही मरीज की सांस थम जा रही है। कमोवेश ऐसी ही स्थिति जांच की भी है। मुख्यालय पर तो जिला अस्पताल, रोडवेज डिपो और कोतवाली परिसर में नियमित जांच की सुविधा है, लेकिन तहसील स्तर पर सिर्फ एक-एक सीएचसी में ही जांच हो रही है। स्वास्थ्य कर्मचारियों के बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित होने के कारण वहां भी जांच की प्रक्रिया सुस्त है। कहीं एक कर्मचारी के भरोसे जांच हो रही तो कहीं दो कर्मचारी हैं। मरीजों की ट्रैकिंग के लिए लगाई गई टीमों के साथ भी यही स्थिति है।
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