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दस वर्षीय बेटे ने दी पिता को मुखाग्नि......

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अरब सागर में लापता हुए थाना क्षेत्र के मितांवा गांव निवासी संतोष यादव के शव की शिनाख्त के बाद परिवार की अंतिम उम्मीद भी टूट गई है। दस वर्ष के बेटे ने मुंबई में ही पिता को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के बाद घर लौटे परिजनों का रोकर बुरा हाल है। पत्नी के कानों में बार-बार संतोष के वह शब्द गूंज रहे हैं, जो तूफान से ठीक पहले संतोष ने फोन पर उससे कहा था।
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मर्चेंट नेवी में कार्यरत रहे संतोष का जहाज 17 मई को तूफान में डूब गया था। इसके बाद से ही वह लापता था। 19 मई को ही संतोष का शव समुद्र से खोज लिया गया था, लेकिन पहचान न हो पाने के कारण पत्नी व पिता को शव नहीं मिल सका था। डीएनए टेस्ट से पहचान स्पष्ट होने के बाद तीन जून को शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया। दस वर्षीय पुत्र दीपांशु ने पिता को मुंबई में ही मुखाग्नि दी। ओएनजीसी की ओर से पत्नी सुनीता यादव को दो लाख और नियोक्ता मैथ्यू कंपनी ने पांच लाख रुपये की सहायता दी है। बीमा राशि का भुगतान अभी नहीं हो सका है। शुक्रवार की रात घर लौटने के बाद से ही पत्नी सुनीता का रोकर बुरा हाल है। शनिवार की सुबह से ही उनके घर पर शोक संवेदना जताने वालों की भीड़ लगी रही। वह संतोष के अंतिम शब्द याद कर रही है कि अब शायद बात न हो। पिता मथुरा प्रसाद यादव, माता आरती देवी, पुत्र दिपांशु, प्रियांशु और पुत्री दिव्या की सूनी आंखें अपने पिता को ढूंढ रही हैं। संतोष की मौत के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। सुबह से किसी के घर चूल्हा नहीं जला। घर पर आने जाने वालों की भीड़ जुटी हुई है।
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