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अभी भी गोमती में गिरता रहेगा नालों का गंदा पानी

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जौनपुर। शहर से निकलने वाला गंदा पानी अभी गोमती नदी में गिरता रहेगा। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण की समय सीमा बढ़ा दी गई है। अब शासन से इसे दिसंबर में पूरा करने का निर्देश जारी किया गया है, जबकि उक्त एसटीपी का निर्माण अक्तूबर में ही पूरा किया जाना था। दो माह अवधि और बढ़ने से कार्यदायी संस्था को राहत मिल गई है। अब तक महज 55 फीसदी कार्य ही पूरा हुआ है।
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सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में प्रतिदिन 28 एमएलडी गंदा पानी निकालता है, जो विभिन्न नालियों और नालों से होकर गोमती में गिरता है। नदी में गंदा पानी न गिरे, इसके लिए सरकार ने नमामि गंगे और अमृत योजना के तहत एसटीपी निर्माण करने का निर्देश दिया था। इन दोनों योजनाओं के तहत कुल मिलाकर 470.80 करोड़ धनराशि स्वीकृत हुई, जिसमें नमामि गंगे योजना के तहत 206.05 करोड़ की धनराशि से 30 एमएलडी क्षमता का एसटीपी और चार पंपिंग स्टेशन और अमृत योजना के तहत 264.77 करोड़ की धनराशि से 159 किमी सीवर पाइप और दो पंपिंग स्टेशन बनाया जाना है। इसके निर्माण का कार्य अक्तूबर 2019 से शुरू किया गया, जिसे अक्तूबर2021 में पूरा किया जाना था, लेकिन अभी तक एसटीपी का निर्माण 55 फीसदी और सीवर पाइप डालने का कार्य मात्र 30 किमी. तक ही हो पाया है। इसी बीच कोरोना संक्रमण के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो गया था, जिसे गंभीरता से लेते हुए सरकार ने इसके निर्माण का समय बढ़ाते हुए दिसंबर माह में कर दिया है।
14 बड़े नालों से गोमती में गिरता है गंदा पानी
शहर का गंदा पानी कुल 14 नालों से गोमती नदी में गिरता है, जिसमें हनुमान घाट, बजरंग घाट, बलुआ घाट, मछरहट्टा, मियांपुर, कटघरा, नखास, अहियापुर, जेसिज, मुफ्ती मोहल्ला सहित अन्य नाले हैं, जिनका पानी एसटीपी का निर्माण होने जाने के बाद उसमें जाएगा, जिसे शोधित कर खेतों की सिंचाई सहित अन्य उपयोग में लाया जाएगा।
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