वाराणसी के बाद जौनपुर जंक्शन के बीच जफराबाद जंक्शन एक बड़ा स्टेशन है। इसे दर्जा तो जंक्शन का दिया गया है, लेकिन यहां सात महत्वपूर्ण ट्रेनों को ठहराव नहीं है। इससे यात्रियों को लंबी दूरी तय जौनपुर या फिर बनारस जाना पड़ रहा है। जफराबाद जंक्शन से प्रतिदिन 76 ट्रेनें गुजरती हैं। स्टेशन का वार्षिक राजस्व 90 लाख है। क्षेत्र के कुल 300 गांवों के यात्री सहित दो नगर पंचायत की कुल आबादी 50 हजार से अधिक है। नगर पंचायत जिसमें कचगांव व जफराबाद है। साथ ही नगर पालिका जौनपुर का आंशिक हिस्सा भी जहां की जनता जफराबाद से ट्रेनों को पकड़ कर अपने गंतव्य स्थान को जाते है। लेकिन सात प्रमुख ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से यात्रियों को लंबी दूरी तय करना पड़ रहा है।
इस स्टेशन से होकर गुजरने वाली श्रमजीवी एक्सप्रेस, सद्भावना एक्सप्रेस, मरुधर एक्सप्रेस, पटना मथुरा एक्सप्रेस, बेगमपुरा एक्सप्रेस, साबरमती एक्सप्रेस, सहित शटल का ठहराव जफराबाद जंक्शन पर नहीं होता। इनके ठहराव की मां की जा रही है।
प्रकाश की व्यवस्था न साफ-सफाई
स्टेशन की साफ सफाई व्यवस्था को देखें तो चारों प्लेट फार्म पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। स्टेशन पर रखा जनरेटर सालों से खराब पड़ा है। प्रकाश व्यवस्था लोकल लाइट के भरोसे पर टिकी हुई है। थोड़ी बहुत प्रकाश व्यवस्था स्टेशन को मिलने वाली बैटरी सप्लाई से जोड़ कर काम चलाया जाता है।
पेयजल संकट से जूझ रहा है जंक्शन जफराबाद स्टेशन पेयजल की की समस्या से जूझ रहा है। स्टेशन पर मात्र एक इंडिया हैंड पंप लगा है जिससे लोग प्यास बुझा रहे है। वह भी गंदगी व अव्यवस्था का शिकार है। बताया जाता है कि इन दिनों स्टेशन की मोटर जली हुई है। जिस वजह से स्टेशन पर पेयजल की समस्या बढ़ गई है।