कोर्ट की खबरें
एसओ खरेरा को गिरफ्तार करने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। खुटहन थाना क्षेत्र का राज्य बनाम तेज बहादुर मुकदमे में वारंट के बावजूद पेश नहीं होने पर न्यू कोर्ट प्रथम के न्यायधीश सुभाष चंद्र शुक्ला ने पुलिस अधीक्षक को तत्कालीन थानाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह को गिरफ्तार करके पेश करने का आदेश दिया है। इंस्पेक्टर की तैनाती महोबा के खरेरा थाने में है। कोर्ट ने थानाध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
खुटहन थाना क्षेत्र का राज्य बनाम तेज बहादुर का मामला न्यायालय में चल रहा है।ं इसमें कोर्ट ने गवाही के लिए बार-बार तलब किया गया लेकिन तत्कालीन थानाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह आदेश की अवहेलना करते हुए कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। उसके बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया । थानाध्यक्ष खुटहन ने कोर्ट में आख्या प्रस्तुत की कि कांस्टेबल ने थाना खरेरा जनपद महोबा के कार्यालय में प्राप्त कराया गया। कोर्ट ने थानाध्यक्ष खुटहन द्वारा किया गया संपूर्ण कार्यवाही दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के विपरीत माना क्योंकि गैर जमानती वारंट का निष्पादन सिपाही नहीं करा सकता है। मगर जीडी पर थानाध्यक्ष खरेरा का नाम नंबर अंकित है। इससे यह स्पष्ट है कि उन्हें गैर जमानती वारंट की जानकारी हो गई थी और उन्होंने जानबूझ कर न्यायालय के आदेश की अवहेलना की है। इस पर कोर्ट ने जौनपुर के पुलिस अधीक्षक को अनिल कुमार सिंह को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश करने को कहा है।
------------------------------
श्रमजीवी विस्फोट के आरोपी कोर्ट में पेश
जौनपुर। श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन विस्फोट कांड के आरोपी हिलाल उर्फ हिलालुद्दीन और नफीकुल विश्वास को बुधवार को जिला कारागार से पुलिस सुरक्षा के बीच एडीजे प्रथम की कोर्ट में पेश किया गया। न्यायाधीश ने बहस के लिए 14 अक्टूबर की तिथि नियत की है ।
28 जुलाई 2005 की शाम सवा पांच बजे पटना से दिल्ली जाने वाली श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन की साधारण बोगी में हरपाल गंज रेलवे स्टेशन के हरिहर पुर रेलवे क्रासिंग पर जोर का बम धमाका हुआ था। 16 यात्रियों की मौत और 64 से अधिक यात्री घायल हो गए थे । चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया था। इस मामले में आतंकी मोहम्मद आलमगीर उर्फ रोनी तथा ओबैदुर रहमान उर्फ बाबू भाई को कोर्ट द्वारा दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है । इसकी अपील हाईकोर्ट में लंबित है। उस समय आरोपी हिलाल और नफीकुल अन्य मामले सुनवाई के लिए हैदराबाद जेल भेज दिए गए थे , जिसके चलते इनके मामले में बहस नहीं हो पाई थी।