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Jaunpur News: कहीं अधूरे शौचालय तो कहीं लटके ताले

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ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये की लागत से बने सामुदायिक शौचालयों का संचालन कहने को तो नियमित हो रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। यहां के अधिकतर गांवों में या तो शौचालय अधूरे पड़े हैं या फिर उनके ताले ही नहीं खुल रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों को अब भी खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। पंचायती राज विभाग की ओर से स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर शौचालय बनवाएं गए हैं, लेकिन तमाम ग्रामीण ऐसे हैं जिनके पास शौचालय बनवाने के लिए भूमि ही नहीं है। ऐसे लोग भी खुले में शौच नहीं जाएं इसको देखते हुए हर ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचाल का निर्माण कराया गया है। शौचालय की देखरेख के लिए स्वयं सहायता समूह के माध्यम से केयर टेकर रखे गए हैं। इन्हें हर महीने एक निर्धारित धनराशि भी दी जाती है। सोमवार को पड़ताल की गई तो पता चला है कि कुछ शौचालय अधूरे पड़े हैं। कुछ में रनिंग वाटर सप्लाई नहीं है तो कुछ में टाइल्स और सीट नहीं लगी है। नतीजन अभी भी ग्रामीण खुले में शौच जाने के लिए विवश हैं। सुइथाकला ग्राम पंचायत सलेमपुर में बने सामुदायिक शौचालय में सीट लगाकर छोड़ दिया गया इसमें न तो टाइल्स लगाया गया न ही पानी की व्यवस्था है। जबकि बाहरी दीवार को रंगाई पोताई कर सजा दिए गए है। अंदर कूड़ा करकट से पटा है। सुइथाकला के मित्तूपुर गांव में बने शौचालय में बाहरी दीवार को चकाचक करा दिया गया है जबकि टैंक अधूरा बना है ऊपर से ढका तक नहीं गया है। पानी की व्यवस्था नहीं होने से छत पर रखी टंकी शोपीस बनी है। बाहर से हमेशा ताला लगा रहता है। प्रधान कौशल यादव ने बताया कि शौचालय का निर्माण पूर्व प्रधान द्वारा बनवाया गया था। जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज कुमार त्यागी ने बताया कि सभी शौचालयों को खोले रखने के लिए सभी को निर्देश दिया गया है। इसकी मॉनीटरिंग भी की जा रही है। जो कमी है उसको शीघ्र ही दुरूस्त कराया जाएगा।
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