जौनपुर। हैलो, आप गोलू के पापा बोल रहे हैं। मिड-डे-मील का राशन आ गया है, स्कूल आकर ले जाइए। शनिवार को दोपहर 12 बजे कंपोजिट विद्यालय मियांपुर पर शिक्षक ऐसे ही बच्चों के अभिभावकों को सूचना देते रहे। कोरोना काल के बाद विद्यालय तो खुल गए, लेकिन वहां अभी बच्चे नहीं पहुंच रहे। ऐसे में स्वेटर, जूता और राशन के लिए शिक्षक एक-एक बच्चे को अभिभावकों को फोन कर बुला रहे हैं। स्कूलों में करीब छह घंटे का समय उनका ऐसे ही बीत रहा है। एक-दो शिक्षक मोहल्ला क्लास में जा रहे हैं तो बाकी स्कूल में बैठकर इन कार्यों में ही दिन बिता रहे हैं।
जिले में 3190 परिषदीय विद्यालय हैं, जिसमें 4.08 लाख बच्चों का पंजीकरण है। कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया जा रहा है। सिर्फ शिक्षकों को ही समय से विद्यालय पहुंचकर ऑनलाइन क्लास सहित अन्य गतिविधियों से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। ज्यादातर शिक्षक स्कूल पहुंच भी रहे हैं, मगर शिक्षण की बजाय उनका ज्यादातर वक्त राशन, जूता, स्वेटर सहित अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने में ही बीत रहा है। जिन स्कूलों में शिक्षक ज्यादा हैं, वहां एक-दो को छोड़कर अन्य स्कूल पर बैठकर बस टाइमपास ही कर रहे हैं।