वाराणसी दूरदर्शन के कार्यक्रम अधिकारी डा. संतोष मिश्र ने कहा है कि स्क्रिप्ट लेखन से कार्यक्रम निर्माण की शुरूआत होती है। एक तरह से कहा जाए तो विजुअल ही टेलीविजन में शब्द होते हैं।
इस क्षेत्र में यह आवश्यक है कि हम दुनियां को किस नजरिए से देखते हैं। वह वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में मंगलवार को ‘वीडियो प्रोग्राम प्रोडक्शन’ विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान माला में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि टेलीविजन एंकर हमेशा ह्यूमन इमोशन पर ध्यान देते है। खुशी की खबर को खुशी और दुख की खबर को दुख की भावनाओं के साथ प्रस्तुत करते हैं।
उन्होंने कहा कि फिल्मों में 70 प्रतिशत विजुअल और 30 प्रतिशत डायलॉग, ऑडियो पर निर्भर रहता है। जबकि टेलीविजन की स्क्रिप्ट राइटिंग इससे भिन्न होती है। इसमें ऑडियो और डायलॉग का प्रतिशत 30 से बढ़ जाता है।
टेलीविजन की स्क्रिप्ट इमोशन, शॉट, एंगल, लाइटिंग आदि को ध्यान में रखकर लिखी जाती है। सम्पादन, सृजन, रचना से प्रोग्राम निर्माण किया जाता है।
इसके अलावा उन्होंने पटकथा, कैमरा एंगल आदि पर विस्तृत प्रकाश डाला। कहा कि जब मास कॉम के छात्र संचार की दुनियां में कदम रखेंगे तो उन्हें लेखन, फोटोग्राफी और लेखन के क्षेत्र में काफी सावधानी बरतनी होगी।
विभागाध्यक्ष डा. अजय प्रताप सिंह ने अतिथि को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. अवध बिहारी सिंह, पंकज कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे।