मथुरा में दरोगा संतोष यादव के शहीद होने की खबर लगते ही सुजानगंज क्षेत्र स्थित उनके पैतृक गांव केवटली में मातम छा गया था। मां अभिराजी देवी, पत्नी मिथिलेश और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था।
शुक्रवार को जैसे ही लोगों को यह खबर मिली आसपास के कई गांव के लोग और रिश्तेदार भी यहां पहुंच गए, सबकी सिसकियां बंधी रहीं। देर रात शव पहुंचने से पहले दिन में डीएम भानुचंद्र गोस्वामी, एसपी रोहन पी कनय, विधायक ओम प्रकाश बाबा दुबे, भाजपा विधायक सीमा द्विवेदी आदि ने पहुंच कर परिवार को ढांढस बंधाया।
शव पहुंचने के बाद लोगों की सिसकियां चीत्कार में बदल गईं।लालबहादुर यादव के तीन पुत्रों में संतोष दूसरे नंबर के थे। बड़े पुत्र अजय यादव और उनकी पत्नी दोनों मूक बधिर हैं। छोटा भाई राय साहब यादव इलाहाबाद में प्रतियोगी परीक्षाओं तैयारी कर रहा है।
संतोष यादव ने भी अपनी पढ़ाई इलाहाबाद से पूरी की थी। उन्होंने हिंदी से एमए किया था। वर्ष 2001 में वे एसआई बने। 2002 में उनकी शादी प्रतापगढ़ जिले के देवसरा क्षेत्र के विनयका गांव निवासी रणधीर यादव की पुत्री मिथिलेश के साथ हुई।
मिथिलेश इंटर तक पढ़ीं हैं। संतोष की दो बहनें गीता और संगीता की शादी हो चुकी है। पिता लालबहादुर की पांच साल पहले मौत हो चुकी है। वह मुंबई में दुग्ध विभाग में कार्यरत थे। पिता की मौत के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी संतोष पर ही थी। वह अपने बेटे निखिल (13) व बेटी श्रेया (8) की पढ़ाई के साथ अपने छोटे भाई रायसाहब
यादव व इलाहाबाद में पढ़ रहे चचेरे भाई राहुल व अरुण की भी पढ़ाई का खर्च उठाते थे। 27 मई को संतोष की पत्नी अपने बेटे निखिल और बेटी श्रेया के साथ केवटली आई थीं। डीएम भानुचंद्र गोस्वामी, एसपी रोहन पी कनय, एसडीएम ममता मालवीय, एसपी ग्रामीण अरुण कुमार श्रीवास्तव, सीओ जटाशंकर राव ने परिवार के लोगों को ढांढस बंधाया।