अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल की ओर से शनिवार की रात शहर के सारा पैलेस में ईद मिलन एवं मुशायरा का आयोजन किया गया। कानपुर से आई अंतर्राष्ट्रीय शायर शाइस्ता सना ने अपने कलाम में पढ़ा कि बिन साजन के ईद भी मोहर्रम की तरह लगती है। वहीं अंतरराष्ट्रीय शायर रामपुर से आए वसीम रामपुरी ने मुल्क के दुखती रग को छूते हुए मौजूदा हालात पर अपने कलाम पेश किए। रामिश दिलावरपुरी ने पड़ोसी मुल्क को चेताते हुए कहा कि हम सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं।
इलाहाबाद के कवि बिहारी लाल अंबर ने अपनी कविता धुक्कुर धू धुक्कुर धू के माध्यम से लोगों को खूब हंसाया। अंसार जौनपुरी ने कौमी एकता पर कलाम पेश किया। यहां पर मत बांटों त्रिशूल यहां पर मत बांटों तलवार, हनीफ जौनपुरी ने कलाम पेश किया आओ एक ऐसा जहां बसाए जहां हिन्दू ईद व मुस्लिम होली मनाएं, आयो एक ऐसा जहां बसाएं। अहमद नेसार ने गजल पेश किया। अकरम जौनपुरी ने भी अपने शायरी के माध्यम से लोगों के किरदार को बताने का काम किया। अकिल जौनपुरी ने शायरी के माध्यम से मौजूदा हालात में लोगों की एक दूसरे के प्रति सोच बदलने की जरूरत बताई।
मोनिश जौनपुरी व कमबख्त जौनपुरी ने पारिवारिक हालात पर अपनी शायरी के माध्यम से हंसाया। जिला महामंत्री अशोक साहू ने आभार प्रकट किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष श्रवण जायसवाल ने की। मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य बृजेश सिंह प्रिंसू रहे। उन्होंने धार्मिक और जातीय बाधाओं से ऊपर उठकर विकासवादी होने की अपील की। विशिष्ट अतिथि राजेन्द्र सिंह ने कहा कि इस तरीके सामाजिक आयोजन लगातार होने चाहिए। संयोजक नगर अध्यक्ष अनवारूल हक गुड्डू ने कहा कि आपसी सौहार्द बनाये रखना जौनपुर की पहचान है। इस मौके पर अमर नाथ मोदनवाल, उमापति केडिया, शिव कुमार साहू, मोहित श्रीवास्तव, शशि श्रीवास्तव, जावेद सिद्दीकी, पवन जायसवाल, कमालुद्दीन अंसारी, राजन यादव, लक्ष्मीकांत, दीपक गोस्वामी, गुलजारी लाल साहू, शेर सलाउद्दीन, सुरेन्द्र जायसवाल, राजू जायसवाल, इकबाल खां, शहजादे, इरफान मंसूरी, शाहिद मंसूरी, सुबाष गुप्ता, अमर बहादुर सेठ, शिवम बरनवाल आदि उपस्थित रहे।