बक्शा। नौपेड़वा बाजार में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन अयोध्या धाम से पधारे कथा वाचक निर्मल शरण महाराज ने कहा की श्रीमद्भागवत कथा सुनने से पाप नष्ट हाेते हैं और कल्याण होता है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से धुंधकारी जैसे पापी का भी कल्याण हो गया।
निर्मल महराज ने ऋषभ चरित्र, भरत चरित्र, अजामिल उद्धार, रामकथा, प्रहलाद चरित्र एवं कृष्णावतार की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि अगर इस संसार में कुछ सत्य है तो वह ईश्वर है। रामकथा का वही अधिकारी है जिसका सतसंग प्यारा हो। एक बार शंकर जी पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे। कथा को तोता भी सुन रहा था। कथा सुनने के दौरान पार्वती को निद्रा आ गई। कथा श्रवण कर जा रहे तोते को देख भगवान शिव को क्रोध आ गया। भगवान शिव ने त्रिशूल फेका तो तोता भागते हुए महर्षि व्यास की पत्नी के मुख में प्रवेश कर गया।
उन्होंने कहा कि भागवत पुराण की रचना गणेश ने की है। जिसे भगवान सुखदेव महाराज परीक्षित को सात दिन सात रात में कथा सुनाए थे।
इस दौरान आचार्य पंडित राजेंद्र महाराज, मुख्य यजमान डॉ.पारसनाथ निगम, सिद्धा देवी, डॉ.अजय निगम, देवेंद्र सिंह, पंडित सौरभ मिश्र आदि मौजूद रहें।