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शायर आकिल जौनपुरी का निधन

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आरक़ल जौनपुरी की फोटो। - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। सांप्रदायिक सौहार्द के मिसाल व शायर आकिल जौनपुरी का सोमवार की रात निधन हो गया। वह 65 वर्ष के थे। शहर के मकदूम शाह अढ़न स्थित आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। निधन की खबर मिलते कवि, शायरों व साहित्य जगत में शोक छा गया।
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मशहूर शायर कामिल शफीकी के पुत्र आकिल जौनपुरी की हिंदी व उर्दू दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ थी। साहित्यिक सृजन के अलावा संचालन में भी उन्हें महारत प्राप्त थी। कई पुस्तकों के लेखन व संपादन से भी जुड़े रहे। उनके शेर कभी सुना था ऐसा लफड़ा, गुल का है बुलबुल से झगड़ा, कमजोरों को मार रहे को, उससे निपटो जो है तगड़ा..., ये भी जो जुल्मो सितम का जोड़ है, तीर खाकर मुस्कुराना चाहिए... काफी चर्चित रहे। साहित्यिक संस्था कोशिश की ओर से उन्हें आजीवन उपलब्धि सम्मान से भी नवाजा गया था। उनके निधन पर मनोविज्ञान के प्राध्यापक व रचानाकार प्रो. आरएन सिंह, प्रो. अनूप वशिष्ठ, डॉ. पीसी विश्वकर्मा, गिरीश कुमार श्रीवास्तव, अशोक मिश्रा, डॉ. सभाजीत द्विवेदी प्रखर, अनिल उपाध्याय, विमला सिंह, अमृत प्रकाश, रामजीत मिश्रा, मोनिस जौनपुरी, असीम मछलीशहरी, जनार्दन प्रसाद, पाषाण, पारुल आदि ने श्रद्धांजलि दी।
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