जौनपुर। शहर में चल रहे सीवर लाइन बिछाने के कार्य में अनियमितताएं सामने आई हैं। उन मोहल्लों में भी सीवर लाइन बिछा दी गई है जो डीपीआर में शामिल ही नहीं है। पहले बिल में करीब दस हजार मीटर बैरिकेडिंग का भुगतान कर दिया गया है, जबकि डीपीआर में पूरे कार्य के लिए सिर्फ आठ सौ मीटर ही बैरिकेडिंग को मंजूरी मिली है। अहम बात तो यह है कि कार्यस्थल पर इतनी बैरिकेडिंग हुई भी नहीं थी। अब जिम्मेदार डीपीआर में त्रुटियां बताते हुए उसमें संशोधन की दलील दे रहे हैं।
अमृत योजना के तहत शहरी क्षेत्र में सीवर लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। करीब ढाई सौ करोड़ की इस परियोजना को अक्तूबर 2021 में पूरा होना है। कुल 160 किमी लंबी सीवर लाइन के सापेक्ष 20 किमी का काम पूरा हो चुका है। पिछले दिनों कार्यदायी फर्म टेक्नोक्राफ्ट को पहली रनिंग बिल के रूप में करीब 4.10 करोड़ रुपये का भुगतान भी हो चुका है। बिल में 75 लाख रुपये टबिंरिंग और बैरिकेडिंग पर खर्च दिखाए गए हैं। कार्यदायी संस्था ने दस हजार मीटर बैरिकेडिंग का बिल लगाया है। सीवर लाइन की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में सिर्फ 850 मीटर की बैरिकेडिंग ही पूरी कार्ययोजना में स्वीकृत है। यही नहीं डीपीआर में कलीचाबाद सहित कई इलाकों को शामिल ही नहीं किया गया है, बावजूद वहां अन्य इलाकों से पहले ही सीवर लाइन बिछा दिया गया है। मामला सामने आने के बाद विभागीय में खलबली मच गई है। आननफानन अब डीपीआर में गड़बड़ी बताते हुए इसमें संशोधन की तैयारी शुरू कर दी गई है।