सिकरारा। खानापट्टी आदर्श रामलीला समिति की ओर से रविवार की रात में राम वनगमन लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। मंचन को देख सभी की आंखें नम हो गईं।
कैकेयी-मंथरा संवाद से लेकर राम-केवट संवाद तक के दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। रामलीला का शुभारंभ महल में कैकेयी और उसकी कुबड़ी दासी मंथरा के संवाद से हुआ। मंथरा ने कैकेयी को भरत को राजा और राम को वनवास दिलाने के लिए उकसाया। कैकेयी कोप भवन में जाकर हठ करने का सजीव अभिनय किया, जिसे देख दर्शक आक्रोशित हो गए। इसके बाद दशरथ-कैकेयी संवाद में करुणा का दृश्य छा गया। दशरथ ने पुत्र मोह में कैकेयी के दो वरदान सुनकर विलाप किया तो पंडाल में सन्नाटा पसर गया। दूसरे दृश्य में राम के राजतिलक की तैयारी के बीच वनवास की सूचना का मंचन हुआ। राम ने पिता की आज्ञा को सहर्ष स्वीकार कर मर्यादा का संदेश दिया। संवाद