जौनपुर। नगरीय निकाय चुनाव में अध्यक्ष व सभासद के चुनाव में कुल 1380 प्रत्याशियों ने नामांकन किया था। चुनाव आयोग के निर्देश पर तीन माह के अंदर 13 अगस्त तक प्रत्याशियों को अपने खर्च का व्यय विवरण निर्वाचन कार्यालय में जमा करना था। इसमें से 1344 प्रत्याशियों की 22.54 लाख रुपये जमानत धनराशि जब्त हो गई। इसमें से महज 36 की जमानत धनराशि वापस की जाएगी। इसके लिए सभी का खाता नंबर व अन्य अभिलेख मांगा गया है।
जिलेभर में 12 नगर निकाय हैं, इसमें नगर पालिका परिषद जौनपुर, शाहगंज, मुंगराबादशाहपुर तो नगर पंचायत में जफराबाद, केराकत, गौराबादशाहपुर, खेतासराय, बदलापुर, मछलीशहर, मड़ियाहूं, रामपुर, कचगांव हैं। जिले में निकाय चुनाव 13 मई को संपन्न हुआ था। इसके बाद जिन प्रत्याशियों की जमानत राशि बची है, उनको तीन माह के अंदर यानी 13 मई तक ट्रेजरी में खर्च व्यय का विवरण जमा करना था। जिलेभर में देखा जाए तो नगर पालिका के अध्यक्ष पद पर 23 नामांकन व नगर पंचायत के अध्यक्ष पद पर 104 नामांकन हुए थे। नगर पालिका सभासद के लिए 471 व नगर पंचायत सभासद के लिए 782 उम्मीदवारों ने नामांकन किया था। इससे कुल जमानत राशि 23.19 लाख रुपये प्राप्त हुई। इसमें से 22.54 लाख रुपये की जमानत धनराशि जब्त करके आयोग के खाते में चली गई। जिन 36 की जमानत राशि लौटाई गई, उसमें अध्यक्ष के सात व सभासद के 29 हैं। इसमें से सात ऐसे भी हैं, जिन्होंने चुनाव ही नहीं लड़ा या नाम वापस ले लिया। नगर पंचायत अध्यक्ष मड़ियाहूं में पांच में से तीन की जब्त, मछलीशहर में सात में से पांच की जब्त, केराकत में 10 में से नौ की, खेतासराय में नौ में सात की, जफराबाद में पांच में दो की, बदलापुर में 22 में 21 की, रामपुर में 15 में 14 की, कचगांव में 19 में 18 की, गौराबादशाहपुर में 12 में 10 की जमानत जब्त हुई। नगर पालिका परिषद जौनपुर के अध्यक्ष सात में से सात की, मुंगराबादशाहपुर में पांच में तीन की, शाहगंज में नौ में सात की जमानत जब्त हुई।
जमानत धनराशि जब्त होने का मानक :-
उस पद पर कुल पड़े वैध मत का प्रत्याशी को 20 फीसदी वोट मिलना चाहिए। खर्च का व्यय विवरण निर्वाचन परिणाम आने के बाद तीन माह के अंदर जमा करना होगा। जमानत वापसी का आवेदन पत्र आना चाहिए।
जमानत धनराशि उनकी जब्त की गई है जिन प्रत्याशियों ने कुल पड़े वैध मत में से 20 फीसदी से कम मत प्राप्त किए हैं। इसके बाद 13 मई को चुनाव संपन्न होने के बाद 13 अगस्त तक खर्च का व्यय विवरण ट्रेजरी में जमा करना होता था।
राकेश सिंह, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी।