करंजाकला। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू होने से छात्रों में असंतोष बढ़ गया है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की गाइडलाइन की अनदेखी करते हुए जल्दबाजी में परीक्षाएं कराई जा रही हैं। इस संबंध में छात्रों ने राज्यपाल को पत्र भेजकर परीक्षा स्थगित करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि यूजीसी के नियमों के अनुसार किसी भी सेमेस्टर परीक्षा से पहले नियमित कक्षाओं के कम से कम 90 कार्य दिवस पूरे होना अनिवार्य है। जबकि विश्वविद्यालय द्वारा इस नियम का पालन नहीं किया गया। छात्रों के अनुसार प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा 31 जनवरी को समाप्त हुई थी और इसके तुरंत बाद 5 फरवरी से द्वितीय सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू कर दी गईं। लेकिन, पर्याप्त समय तक नियमित पढ़ाई कराने के बजाय 17 अप्रैल से ही द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा शुरू करने का निर्णय ले लिया गया। छात्रों ने अपने पत्र में बताया कि विश्वविद्यालय की अवकाश सूची के अनुसार 5 फरवरी से 16 फरवरी के बीच 10 राजपत्रित अवकाश और 10 रविवार रहे, यानी कुल 20 दिन कक्षाएं नहीं चलीं। इस प्रकार वास्तविक रूप से केवल लगभग 50 कार्य दिवस ही नियमित पढ़ाई हुई। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा आयोजित कर दी, जो यूजीसी की गाइडलाइन के सीधे उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है। छात्रों का यह भी आरोप है कि इससे छात्रों में असमंजस और मानसिक दबाव की स्थिति पैदा हो गई है। उनका कहना है कि कम समय में पाठ्यक्रम पूरा करना बेहद कठिन हो गया है और परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। छात्रों ने राज्यपाल को भेजे गए पत्र में कहा है कि जल्दबाजी में परीक्षा कराने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और वे मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि यूजीसी के नियमों का पालन करते हुए द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाएं स्थगित की जाएं और पहले नियमित कक्षाओं के 90 कार्य दिवस पूरे कराए जाएं। हालांकि विश्वविद्यालय की तरफ से पहले भी पत्र जारी करते हुए कहा गया है कि उनके यहां की कक्षाएं ऑफलाइन, ऑनलाइन चलाकर पूरी की जा चुकी हैं।