खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग को धन उगाही का धंधा बना लिया है। दूकानों से खाद्य पदार्थों का नमूना लेकर उसे प्रयोगशाला भेजने के बाद व्यापारियों से सेटिंग गेटिंग के बाद उन्हें सैंपल का गोपनीय कोड बता दिया जाता है।
यही कोड लेकर व्यापारी प्रयोगशाला पहुंच रहे हैं और वहां कर्मचारियों से साठगांठ कर रिपोर्ट अपने पक्ष में लगवा रहे हैं। मेरठ स्थित एफडीए की प्रयोगशाला में अमर उजाला की स्टिंग में इस बात का खुलासा होने पर डीएम ने मामले में जांच बैठा दी है।
अमर उजाला की स्टिंग में इस बात का खुलासा हुआ है कि जौनपुर के खाद्य औषधि एवं प्रशासन विभाग ने एक मिठाई की दूकान से नमूना भरने के बाद न सिर्फ व्यापारी को नमूने का गोपनीय कोड बता दिया बल्कि उसे किस प्रयोग शाला में भेजा गया है। किस डेट में वहां रिसीव हुआ है यह जानकारी भी व्यापारी को दे दी।
उसी कोड को लेकर जिले के सुजानगंज का एक मिठाई कारोबारी अपने एक साथी के साथ मेरठ पहुंच गया। वहां एफडीए की प्रयोगशाला में सेंटिंग के चक्कर में जिले का यह कारोबारी अमर उजाला के रिपोर्टर को लैब का कर्मचारी समझ कर सारा राज बता दिया। इस बात का खुलासा होने पर जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने मामले में जांच बैठा दी है।
इस संबंध में उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों का नमूना भरने के बाद उसे एक विशेष कोड पर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है। कोड गोपनीय होता है जो सिर्फ विभाग के अधिकारियों को पता होता है। व्यापारी को कोड बताना गंभीर मामला है। इसकी जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।