काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि इमारतें बनती हैं और ढह जाती हैं, लेकिन परंपराएं अक्षुण्ण होती हैं। यह निरंतर चलती रहती हैं। त्याग और प्रेम सबसे उच्च मूल्य हैं। यही भारत की पहचान हैं। त्याग और प्रेम ने ही देश को आजादी दिलाई।
वह शनिवार को टीडी कालेज के बलरामपुर हाल में हिंदी साहित्य परिसर की ओर से आयोजित वर्तमान साहित्य में मानव मूल्यों की प्रासंगिकता विषयक गोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पं. मदन मोहन मालवीय, ठाकुर तिलकधारी सिंह, रवींद्र नाथ ठाकुर जैसे महान लोग अपने त्याग और बलिदान की छाप छोड़ गए हैं। उनके अथक प्रयास की देन है कि आज ये शिक्षण संस्थाएं पूरे देश में अपनी पताका फहरा रहीं हैं।
सफलता सार्थकता का पैरामीटर नही है। जीवन अर्थपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर किसी को खुद से पहल करनी चाहिए। जो व्यक्ति खड़ा होता है, उसका भाग्य भी उसके साथ खड़ा हो जाता है। जो लोग सतत प्रयास करते हैं, उन्हें जीवन के किसी ना किसी मोड़ पर सफलता जरूर मिलती है। तथ्य एवं सत्य में अंतर होता है। आज सदाचार के लिए ऋणात्मक घटनाएं ही उसका मूल्य हैं।
सह जीवन, जिसे आज लिव इन रिलेशनशिप के रूप में परिभाषित किया जा रहा है। इसे अब एक मूल्य के रूप में स्थापित करने का प्रयास हो रहा है। तीसरी दुनिया के लिए हमारा मूल्य बाजार के रूप में प्रयुक्त हो रहा है। काले, गोरे का भेद करने वाले लोग जो कभी हमें औपनिवेश के रूप में देखते थे। आज वह हमें अपने बाजार के रूप में देख रहे हैं। मनुष्य का महान गुण सत्य है।
भगवान राम ने सत्य के लिए ही राज्य त्याग दिया। इस मौके पर हिंदी की विभागाध्यक्ष डा. माधुरी सिंह की पुस्तक अथयात्रा चरैवेति का विमोचन किया गया। मुख्य अतिथि ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रबंधक अशोक कुमार सिंह, संचालन डा. सरोज सिंह ने किया।
इस मौके पर डा. विनोद सिंह, डा. लाल साहब सिंह, डा. डीआर सिंह, डा. आरएस सिंह, डा. राजीव प्रकाश सिंह, डा. एसबी सिंह, डा. जगदीश सिंह दीक्षित, डा. निरूपा, डा. सुनील विक्रम सिंह, डा. वंदना दुबे, डा. सुषमा सिंह आदि मौजूद थीं।